जिसको तुम कहते हो रोमांटिक लव, इसका बाज़ारवाद से बहुत सीधा ताल्लुक है। अच्छे कपड़े पहन लिए, तोहफ़े दे लिए और मज़े कर लिए, लेकिन कुछ पूरा नहीं पड़ रहा; एक अधूरापन, एक कसक रह जाती है। आपकी बेचैनी वैसी की वैसी है। प्रेम का मतलब है कि जिसके साथ हो, उसकी आँखें खोल दो; वो ख़ुद को जानने लगे, मन को समझने लगे, यही प्रेम है। लेकिन ये करना आसान नहीं होता। ये करने की क़ीमत चुकानी पड़ती है। ये करने के लिए तुम्हें अपना सर्वस्व भी निछावर करना पड़े, तो कर दो। यही है वैलेंटाइन डे।
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आचार्य प्रशांत: हाँ भाई, क्या चल रहा है?
प्रश्नकर्ता: देखिए आप। (टेबल पर कुछ उपहारों को इंगित करते हुए।)
आचार्य प्रशांत: मैं तो देख ही रहा हूँ ये सब चौपाल समझ में तो मुझे आ रही है, लेकिन इसने मुझे क्यों बुलाया है?
प्रश्नकर्ता: एक सेकंड चॉकलेट खोल लूँ।
आचार्य प्रशांत: चॉकलेटें खुल रही हैं, तोहफ़े, गुब्बारे। इसमें क्या है, भाई?




