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उसने आँख मारी, तुम्हें मज़ा आ गया! || नीम लड्डू
Author Acharya Prashant
Acharya Prashant
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तुम्हें लगता है, “वाह! मज़ा आ गया। लाइन दे दी उसने।“

अरे! तुझे लाइन नहीं दे दी है। सेंटेंस लिख दिया है, मृत्युदंड!

जब किसी को मृत्युदंड दिया जाता है जानते हो क्या लिखता है जज? “टू बी हैंगड टिल डेथ!"

अब यह लटकेगा जब तक मरेगा नहीं। हर कामुक आदमी की यही दशा है, वह लटका ही हुआ है जब तक मरेगा नहीं। तुम्हें लगता है, “वाह! मज़ा आ गया। मैंने आँख मारी उधर से भी आँख आ गई मर के!” यह जो मरी हुई आँख है यह न-जाने क्या-क्या मारेगी तुम्हारा अब। लगे हुए हैं, लगे हुए हैं इन्हीं बेवकूफियों में। अरे बाबा! मुझे ना लड़की से कोई समस्या है ना लड़के से कोई समस्या है, मुझे ज़िन्दगी के बर्बाद जाने से समस्या है। इंसान हो तुम, सूअर, गधे, कुत्ते कोई जानवर थोड़े ही हो कि कैसी भी ज़िंदगी बिता लो चलेगा।

तुम्हारा अधिकार है एक ऊँचे जीवन पर!

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