
प्रश्नकर्ता: सर, आइ हैव स्टार्टेड लिसनिंग टू यू वेरी रिसेंटली, एंड आइ मस्ट से, आइ ऐम वेरी फ़ॉन्ड ऑफ़ योर वीडियोज़। दे आर वेरी आइ-ओपनिंग। दे मेड मी रीथिंक माय एंटायर लाइफ़। आइ हैव सो मेनी क्वेश्चन्स। आइ केम हियर विथ द थॉट आइ ऐम गोइंग टू आस्क सो मेनी क्वेश्चन्स। बट देन आइ पिक्ड अप दिस बुक एंड आइ सॉ द इंडेक्स एंड आइ थिंक मोस्ट ऑफ़ द आंसर्स लाई इन हियर।
एंड आई जस्ट वांट टू आस्क यू। आई डोंट वांट टू साउंड लाइक अ विक्टिम ऑर एनीथिंग। लेकिन यह होता है कि हम हमारे दिमाग में ख़ुद को विक्टिम बना लेते हैं। एंड हमारा पोटेंशियल उस वजह से हम अचीव नहीं कर पाते।
कई सालों से, आई एम प्रिपेयरिंग फॉर सिविल सर्विस, और आप भी उस दौर से गुजर चुके हो। बट यू क्रैक्ड इट इन योर फर्स्ट गो, एंड आई एम फेसिंग। आई एम इन अ फ़ेज़ जहाँ पर मैं बहुत ज़्यादा सेल्फ डाउट कर रही हूँ अब ख़ुद को। तो व्हाट कैन यू सजेस्ट फॉर दैट?
आचार्य प्रशांत: सेल्फ डाउट बड़ी रिडंडेंट सी चीज़ है न। हमारा काम है पूरी तैयारी करना, पूरी मेहनत करना। अगर हमने सही गोल चुना है, तो उसमें पूरी जान लगा देना। अब जो होगा सो होगा। अगर तैयारी नहीं पूरी होगी, तो रिज़ल्ट वैसे भी ठीक नहीं आएगा। और अगर तैयारी अच्छी है, तो वो रिज़ल्ट में दिखाई दे जाएगी।
तो पहले से डाउट करना मतलब, माने जो एनर्जी जानी चाहिए थी प्रिपरेशन में, वो एनर्जी जाएगी अब डाउट में। फॉरकास्टिंग की ज़रूरत क्या है? रिज़ल्ट तो आएगा ही, अपने आप आएगा न, तो हम पहले से ही क्या परवाह करें? वो तो एक दिन यूपीएससी ख़ुद ही पब्लिश कर देगी रिज़ल्ट को। यूपीएससी को हम पब्लिश करने देते हैं, हम एडवांस फॉरकास्टिंग क्यों करें उसकी? है न?
हम अभी वो करें जो हम कर सकते हैं। हम क्या कर सकते हैं? कि हम मेहनत करें। लेकिन मेहनत पूरी किसी काम में तभी डल पाती है जब पहले उस काम के लिए कन्विक्शन हो, जब यह पता हो कि यही काम ठीक है मेरे लिए। जब ये बात पता होती है, तो इंसान उसमें जी-जान से जुड़ पाता है।
तो अपने आप को पहले यह अच्छे से समझाइए। देखिए कि क्या आपके पास वाजिब कारण हैं, मजबूत तर्क हैं यूपीएससी की तैयारी करने के, और अगर हैं, तो मेहनत तो फिर आप करेंगे ही करेंगे। उसमें फिर इधर-उधर की सोचने का वक़्त नहीं रहेगा। उसके बाद, अगर जिसे हम सक्सेस कहते हैं, कि सिलेक्शन हो जाना, वो नहीं भी होता तो आप जो करना चाहते हो, उसके लिए कोई दूसरा रास्ता ढूँढ लोगे।