आज न कोई हिन्दू है, न मुस्लिम, हमारा मुख्य धर्म उपभोक्तावाद बन चुका है। सोचो, कौन तुम्हें प्रभावित कर पैसे कमाने को प्रेरित कर रहा है, ताकि तुम कमाओ और वो तुमसे फालतू चीज़ों के बहाने पैसा ले ले। खर्च करने से पहले सोचो, अपनी ज़रूरतें कम करो, कम खरीदो, क्योंकि जितना खर्च करोगे, उतना ही खुद को बेचना पड़ेगा। आपका खर्च करना बहुत दूर तक जाता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
आचार्य प्रशांत: आवर बिगेस्ट रिलिजन टुडे इज़ द मार्केट। नन ऑफ़ अस आर हिन्दूज़ ऑर मुस्लिम्स ऑर फ़ॉलोअर्स ऑफ़ एनी अदर रिलिजन। वी आर फ़र्स्ट ऐंड फ़ोरमोस्ट ऑफ़ ओनली वन रिलिजन; नॉट हिदुइज़्म, नॉट जूडीज़्म — कन्ज़्यूमरिज़्म।
(आज हमारा सबसे बड़ा धर्म बाज़ार है। हममें से कोई भी न हिन्दू है, न मुस्लिम है, न ही किसी अन्य धर्म का अनुयायी है। हम न हिन्दू हैं, न यहूदी; हमारा पहला और महत्वपूर्ण धर्म सिर्फ उपभोक्तावाद है)।
तो आपको यही अगर देखना है न कि किस तरह से हमको इन्फ्लुएंस (प्रभावित) करके हमसे पैसे छीने जा रहे हैं, हमारी पूरी लाइफ़, पहले हमें तो प्रमोट (प्रचारित) किया जा रहा है कि पैसे कमाओ। और आपने कभी ये सोचा कि वो पैसे कमाने के लिए कोई आपको क्यों प्रेरित कर रहा है? ताकि जब आप कमा लो तो कोई आपसे वो ले ले, आपको कुछ फ़ालतू चीज़ें देने के बहाने।
प्रश्नकर्ता: यू मस्ट अर्न सो दैट यू कैन गेट इंश्योरेंस पॉलिसी (आप कमाओ ताकि आप बीमा पॉलिसी ले सको)।




