प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा प्रश्न है कि ‘प्रश्नोत्तरी श्री आदि शंकराचार्य रचित’ में बताया गया है कि स्त्री नरक का प्रधान द्वार है। नारी-रूपी पिशाचिनी से बचकर जो रह गया वह समझदार है। प्राणियों के लिए साँकल नारी ही है। तो मेरा प्रश्न ये है कि ये कितना सच है?
आचार्य प्रशांत: बिलकुल सच है। दोहराइए, क्या पढ़ा आपने।
प्र: ‘प्रश्नोत्तरी श्री आदि शंकराचार्य रचित’ में बताया गया है कि स्त्री नरक का प्रधान द्वार है। नारी-रूपी पिशाचिनी से जो बच कर रह गया, वह समझदार है और प्राणियों के लिए साँकल नारी ही है। ये सब बातें कितनी सच हैं?
आचार्य: एकदम ठीक बातें हैं। समझना पड़ेगा क्या कहा गया है।
देखो, पहले तल पर जो बात है वो समझो कि सत्य नहीं बोला जाता। इस श्लोक में या किसी भी श्लोक में सत्य नहीं बोला गया है। उपचार बोला जाता है, समाधान बोला जाता है। और जो समाधान बोला जाता है वो किसी व्यक्ति-विशेष की समस्या के संदर्भ में बोला जाता है।
तो पहले तुम्हें पूछना होगा कि ये जो बात है, ये कही किससे गई है। आचार्य शंकर किनसे बात कर रहे थे जब कह रहे हैं ‘नारी नर्क का द्वार है, तुम्हारा संकट यही है – नारी।‘ किससे बात कर रहे थे?
आचार्य शंकर की कितनी उम्र में मृत्यु हो गई थी? कितनी उम्र में? आप जानते हैं?







