आपने कोई किताब नहीं पढ़ी, आप बैठकर पॉडकास्ट देख रहे हो। आप जो-जो बोला जा रहा है, पहले तो आपको पता नहीं चलेगा कि वो जो आदमी वहाँ बैठा है, वो यूँही कोई फ्रॉड, फ़र्जी है या कोई असली आदमी है। ज़्यादातर जो लोग आते हैं, वो फ्रॉड ही होते हैं। और दूसरी बात, अगर वो मान लो असली आदमी भी है जो पॉडकास्ट में बैठा है, तो उसकी बात आपको समझ में नहीं आएगी क्योंकि आपकी अपनी तो कोई प्रिपरेशन, कोई ग्राउंडिंग है ही नहीं। आपने आज तक कोई किताब नहीं पढ़ी, तो वो जो बोल रहा है, वो समझ में भी नहीं आएगा।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा सवाल हाल ही में हुई तीन घटनाओं को लेकर है। एक गाज़ियाबाद में एक व्यक्ति ने यूट्यूब तांत्रिकों के प्रभाव में आकर एक हत्या कर दी। और वहीं गुजरात में एक तांत्रिक को कई हत्याओं के आरोप में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। और वहीं कुछ दिनों पहले यूपी में एक स्कूल के मालिक ने सैकेंड क्लास के बच्चे की बलि दे दी।
तो ये घटनाएँ सुनने में तो बड़े बीते ज़माने की लगती हैं, पुरानी लगती हैं लेकिन आज-कल ये आए दिन हो रही हैं। इसलिए, ये जिसको हम मॉर्डन सोसाइटी (आधुनिक समाज) बोलते हैं, उसमें ये अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र का इतना प्रभाव क्यों देखने को मिल रहा है? ऐसा क्यों हो रहा है?
आचार्य प्रशांत: ये आप जो दूसरी खबर बता रहे हैं, आपने अगर पूरी बताई होती, तो उसी में उत्तर छुपा हुआ था न? वो जो गुजरात वाला अभी मामला है, उसमें भी उस व्यक्ति ने बताया है कि उसको प्रेरणा यूट्यूब से ही मिली है, अगर मैं उसी मामले की बात कर रहा हूँ जिसकी आप बात कर रही हैं। और उसमें अब ताज़ा खबर, आज की खबर ये है कि उस व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत भी हो गई है।




