सोशल मीडिया एक तल का प्लेज़र देता है, और हम प्लेज़र सीकिंग ही होते हैं। अगर आपका काम ऐसा नहीं है जो पूरी तरह से आपको एब्ज़ॉर्ब कर ले; अगर आपको कहीं और प्लेज़र मिल रहा है, तो आप उधर जाओगे, आप अपने आप को नहीं रोक पाएँगे। काम सही चुनना पड़ेगा, काम को अपने लिए चैलेंजिंग बनाना पड़ेगा ताकि वो आपको पूरा का पूरा सोख ले। ज़िंदगी में कोई अच्छा प्रोजेक्ट चुनिए, जिसको आप दिल दे सकें, तभी आप उसे समय दे पाएँगे। नहीं तो अपने प्रोजेक्ट को छोड़-छोड़ कर आप बार-बार सोशल मीडिया और दूसरे डिस्ट्रैक्शंस की ओर भागेंगे।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: सर, माई क्वेश्चन इज़, लव रिफ्लेक्ट्स द सेल्फ; “ब्यूटी ऐंड ग्रेटनेस डू नॉट कम बाय ऐक्सिडेंट। दे हैव टू बी अर्न्ड, अचीव्ड थ्रू सस्टेन्ड प्रैक्टिस। यू मस्ट पे द प्राइस।”
सर, मेरा प्रश्न है कि हम एक जॉब करते हैं तो हमें पता है कि हमने ये चुना है, बिकॉज़ ऑफ़ मनी एंड सम लाइक इंफ्लुएंस फ्रॉम फ्रेंड्स एंड फैमिली। हम अभी कुछ चेंज करने का सोच रहे हैं; मतलब हम दूसरे करियर ऑप्शंस पर एक्सप्लोर करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रॉब्लम ये है कि मेरा अटेंशन स्पैन भी बहुत कम है। तो मैं बहुत जल्दी सोशल मीडिया की तरफ़ भी चली जाती हूँ। वहाँ जब आपकी वीडियोज़ आती हैं, फिर मैं वापस आती हूँ तो रियलाइज़ करती हूँ कि बहुत टाइम वेस्ट हो गया और जो मुझे करना था वो तो मैंने किया ही नहीं, दिन में बहुत टाइम चला गया। तो इस पर कुछ।
आचार्य प्रशांत: सोशल मीडिया




