आचार्य प्रशांत: जिन्होंने शरीर के ही दम पर प्रसिद्धि पायी, जिनको शरीर के ही नाते जानते हो, उन फिल्मी सितारों की जवानी की और बुढ़ापे की तसवीरें देख लिया करोl देह क्या है, स्पष्ट हो जाएगाl देह भाव से मुक्त होने का अच्छा तरीका हैl
कोई सुपरस्टार हो, देख लो आजकल कैसे लगते हैं। सत्तर के दशक के किसी सुपरस्टार की आज की तसवीरें देख लो या उस ज़माने की कोई तारिका हो, उनकी आज की देख लो तस्वीर। उनमें से बहुत सारी तो आजकल तसवीरें खिंचवाती ही नहीं, लाज आती हैl
पहले कहते थे कि अरे! सुन्दर तो चाह, आकर्षक, माँस, देह, उभार, नाभि, इनसे आकर्षक क्या होता है? फिर बोले, ‘अरे! खाल, इस खाल से क्या चूमा-चाटी करनी?
जिस खाल के ठीक नीचे मल, मवाद, पित्त, मूत्र, तमाम तरह की रज, यही बैठे हुए हैं, बस वो दिख नहीं रहे हैंl इतनी पतली सी, चमड़ी की चादर है (हाथ से पतले का इशारा करते हुए), उस चादर के पीछे छिपा हुआ है मल, मूत्र, इसलिए दिख नहीं रहा हैl क्या चाटे जाएँ उस चमड़ी को?’
चाटते वक़्त ख़्याल नहीं आएगा कि चमड़ी के ठीक पीछे क्या है? जिसको ये विचार आने लग गया, वो कैसे अब देह भाव में जी लेगा, बताओ?
और किसी को तुम्हारी देह का पता हो न हो, तुम्हे तो पता ही हैl औरों से तो हम बहुत सारी चीज़ें छुपा जाते हैंl
औरों के सामने आते हैं तो अपना आँख का कीचड़ पोंछकर आते हैं, नाखून-वाख़ून काट लेंगे, गन्दगी साफ़ कर लेंगेl




