सही फैसले कैसे लें? गलत चुनाव से कैसे बचें? || आचार्य प्रशांत, आइ.आइ.टी. कानपुर के साथ (2023)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। पहले मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ कि मैं आपको लगभग छह महीने से मैं सुन रहा हूँ और मुझे बहुत फ़ायदा हुआ है।
मैं आगे बढ़ते हुए पूछना चाहता हूँ कि हमें हमेशा कुछ-न-कुछ चुनाव करना होता है कि ये करें या तो ये करें। हमें बहुत बार पता नहीं होता है कि क्या सही है, क्या ग़लत है। कभी-कभी ग़लत भी सही समझ कर चुनाव कर लेते हैं, कभी सही चुनाव करते हैं। लेकिन हम कैसे पता करें कि हाँ ये चीज़ सही है, मतलब जो हम चुनाव कर रहे हैं वो हमारे लिए सही है?
तो इसमें बहुत उलझन रहती है। मतलब जीवन में आगे बढ़ने के लिए, ऊँचा-से-ऊँचा स्थान प्राप्त करने के लिए कैसे सही चुनाव करें?
आचार्य: आप बहुत प्यासे हैं — आप बहुत प्यासे हैं और आपके सामने दो दुकानें हैं। एक दुकान है जहाँ पर साधारण, सादा पानी हज़ार रुपए प्रति ग्लास के हिसाब से मिल रहा है, लूट रहे हैं बिलकुल। साधारण सादा पानी हज़ार रुपए प्रति ग्लास के हिसाब से मिल रहा है, और दूसरी दुकान है जहाँ हीरे-मोती मुफ़्त मिल रहे हैं।
आप बहुत प्यासे हैं। और एक दुकान है जहाँ हीरे-मोती भी, बिलकुल असली, खरे हीरे-मोती भी मुफ़्त मिल रहे हैं। और एक दुकान है जहाँ पर कुछ नहीं, बिलकुल साधारण पानी आपको मिल रहा है और वो कह रहा है, ‘हज़ार रूपए का, और थोड़ा ठंडा वाला चाहिए तो पाँच हज़ार का, और उसमे थोड़ा सा शर्बत बनाकर चाहिए तो दस हज़ार का।‘ खुली लूट है।
बताओ किधर को जाओगे?



