Technology अधिक-से-अधिक इतना ही करती है कि मशीन की Efficiency बढ़ा देती है। अगर Technological Development उनके हाथों में है जिनका मन अभी भोगवाद और लालच से मुक्त नहीं है, तो हर प्रकार का तकनीकी विकास आत्मघातक ही होगा। असली समस्या ये है कि हमें भोगना है, हम प्रेम का अर्थ भी भोग समझते हैं। जब मन बदलेगा, तभी दुनिया में हो रही क्षति बदलेगी। ये बहुत बड़ी भ्रान्ति है कि तकनीकी विकास दुनिया को बचा लेगा।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
आचार्य प्रशांत: आज से चालीस साल पहले हिन्दुस्तान की सड़क पर कौन-सी गाड़ियाँ चलती थी? मैं कारों की बात कर रहा हूँ।
श्रोतागण: एंबेसडर।
आचार्य प्रशांत: एंबेसडर और फ़िएट चलती थीं। मान लो पेट्रोल पर चलती थीं, माइलेज क्या देती थीं?
श्रोतागण: दस-बारह।
आचार्य प्रशांत: आठ-दस। फ़िएट दे देती थी दस-बारह का, एंबेसडर दस का भी नहीं देती थी। आठ, ठीक?
आज की जो गाड़ियाँ आई हैं वो उनसे दूना




