पग-पग पर ये क्या चुन रहे हम? || आचार्य प्रशांत, वेदान्त पर (2020)

प्रश्नकर्ता: जैसा आपने बताया कि कोई अन्तिम अवस्था नहीं होती है। हमें निरन्तर जीवनपर्यन्त अपनेआप को शुद्ध करते रहना होगा। तो हम जिन जीवनमुक्त महात्माओं के बारे में हमने जो पढ़ा है ‘निसर्गदत्त महाराज’,’रमण महर्षि’, ‘परमहंस योगानन्द’। वो जिस निरन्तर अवस्था में रहते हैं, वो जो बिलकुल फ्री फ्लो एटीटयूड जो उनका रहता है, वो क्या है? और दूसरा प्रश्न है कि यदि अहम् ने दुनिया बनायी है तो हम हमारी क्या, हम क्यों नहीं उसको कंट्रोल कर पाते हैं? उस दुनिया में हमारा क्या स्टेटस है? उस चीज़ पर हमारा कंट्रोल क्यों नहीं है?
आचार्य प्रशांत: पहली बात तो अगर कोई व्यक्ति हुए हैं अतीत में ऐसे, जो वास्तव में तत्व को समझे हैं। तो उनका लगातार यही काम रहा है कि वो अपनी रोज़ सफ़ाई करते रहे। और उनमें अगर कोई ऐसा है जो दावा कर रहा है कि नहीं, मुझे तो किसी सफ़ाई इत्यादि की ज़रूरत ही नहीं। तो ठीक है। दावे हैं दावों का क्या। बहुत ज़्यादा इस पर खयाल करना नहीं चाहिए कि कौन अपने बारे में क्या बोल रहा है।
अभी भी आपने तीन नाम लिए उसमें से दो नाम एक कोटी के हैं, तीसरा नाम आपने व्यर्थ ही जोड़ दिया। तो कोई अपनी ऑटोबायोग्राफी में कुछ भी उड़ा सकता है, आप पर कोई अनिवार्यता नहीं है कि आप बैठकर विश्वास करने लग जाएँ। आप ये मत देखिए कि कोई अपने बारे में कैसी धूम मचा रहा है। आप ये देखिए कि उसने आपको जो बताया, वो आपके जीवन के लिए कितना सार्थक है।
रमण महर्षि अहम् की बात करते हैं। वो चीज़ आप समझेंगे, अपने जीवन में उसका उपयोग करेंगे तो बहुत सारी गाठें खुलेंगी। और दूसरी और कोई आपको बताये कि देखो, मैं हूँ न मैं यहीं बैठे-बैठे शिकागो पहुँच जाता हूँ और मेरे जन्म से पहले फ़लाने ने आकर मुझे अंगूठी दी थी माँ को, वो पहन लेता हूँ तो मुझे यहाँ का ये दिख जाता है, वहाँ का दिख जाता है, मैं फ़लाने का मन पढ़ सकता हूँ। हाँ! भाई तुम हो बहुत बड़े सिकन्दर, उससे हमें क्या मिल गया?






![क्या आप आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी [इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग] के भाग हैं?](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-3dc72262-a991-4f45-a9d4-a0397e21022c/30/image.jpg)


