Operation 2030 ही क्लाइमेट चेंज रोकने का एकमात्र तरीक़ा है

हम शायद वह आख़िरी पीढ़ी हैं, जो मौसमों को कुछ सामान्य देख पा रहे हैं। सेलिब्रिटी, क्रिकेटर, पॉलिटिशन, या रिलिजस फ़िगर — इन सबका मूल्यांकन इनके कार्बन फुटप्रिन्ट से होना चाहिए। एक बिलियनेयर का जेट दो घंटे में उतना एमिशन करता है, जितना एक भारतीय हज़ारों साल में करेगा। इनके एमिशन से हज़ारों प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं। पृथ्वी जल रही है, मासिव एक्सटिंक्शन हो रहा है। अमीर मौज कर रहे हैं, आम आदमी मर रहा है। Operation 2030 ही क्लाइमेट चेंज रोकने का एकमात्र तरीक़ा है, क्योंकि आत्मज्ञान का अभाव ही क्लाइमेट चेंज है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। मेरा सवाल आज क्लाइमेट चेंज को लेकर है। आज ही एक ख़बर आई है कि उत्तराखंड में एक बादल फट गया था, जिससे गाँव का गाँव बह गया है। साथ ही, कुछ दिनों से हम सुन रहे हैं कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में बाढ़ों की ख़बरें लगातार आ ही रही हैं, और उत्तर प्रदेश के भी कुछ मेन सिटीज़ जैसे, प्रयागराज और वाराणसी से भी बहुत सारी रील्स आ रही हैं, जिनमें लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भर गया है। कुछ लोग डुबकी लगाकर उसकी रील्स डाल रहे हैं, कुछ लोगों को परेशानियाँ बहुत ज़्यादा हो रही हैं, वो भी आ रही हैं सामने।
इसी कॉन्टेक्स्ट में, एक प्रमुख हमारे साइंटिस्ट रहे डेविड सुज़ुकी, जिन्होंने ये कहा है, “इट्स टू लेट टू स्टॉप द क्लाइमेट चेंज।” साथ ही, एक डॉक्टर कार्टर, जो हमारे प्रमुख वैज्ञानिक रहे हैं उन्होंने भी कोट किया था कि “ऑल फ़्यूचर जेनरेशन्स ऑफ़ होमो सेपियन्स ऐंड अदर स्पीशीज़ आर गोइंग टू इनहैबिट ऐन इन्क्रीज़िंगली हैलिश अर्थ।”



