अपने रिश्तों के आधार को समझो और रिश्ता सिर्फ़ माँ-बाप या दोस्तों से नहीं होता। रिश्तों का अर्थ है पूरी ज़िन्दगी, क्योंकि हम रिश्तों में ही जीते हैं। यही कारण है कि जब ज़रूरतें पूरी हो जाती हैं, तो रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं, क्योंकि ये ज़रूरत और निर्भरता के रिश्ते होते हैं। निर्भरता के रिश्ते कभी स्वस्थ नहीं हो सकते।
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प्रश्नकर्ता: हाइयर एजुकेशन (उच्च शिक्षा) अगर पाएँगे, तो घरवालों, समाज सबसे दूर होना पड़ता है। फिर बड़ी परेशानियाँ होती हैं। क्या करें?
आचार्य प्रशांत: ये ज़्यादातर लोगों को ऐसा ही लगता है कि हाइयर एजुकेशन जो है ये कोई संन्यास जैसी चीज़ है पर ये करने के लिए नहीं कहा जा रहा।
प्र: कोई और विकल्प नहीं है।
आचार्य प्रशांत:: हाँ, पर अटैचमेंट्स (आसक्ति) से मुक्ति। कुछ इस तरीके के वर्ड्स (शब्द)।
प्र: घरवालों से दूर होना पड़ता है। अगर मैं कुछ चाहूँ तो मेरे सोसाइटी (समाज) और घरवाले मना करेंगे।




