क्या ॐ की ध्वनि अंतरिक्ष में गूँज रही है? || आचार्य प्रशांत, आइ.आइ.टी दिल्ली महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी! मैंने ट्विटर पर नासा के ऑफिसियल (आधिकारिक) चैनल पर एक पोस्ट देखा था जिसने वो ये कह रहे हैं कि गैलेक्सी (आकाशगंगा) के जो क्लाउड्स (बादल) हैं उसमें उन्होंने साउंड (ध्वनि) डिटेक्ट (पता) कर ली है और उसका जो ऑडियो (श्रव्य) है वो ऑनलाइन रिलीज़ भी किया है जो काफ़ी चर्चा में है। तो वहीं पर कुछ कमेंट्स (टिप्पणियाँ) मैं पढ़ रहा था जिसमें देश के काफ़ी ऊँचे अधिकारियों के भी कमेंट्स हैं। वो ये कह रहे थे कि ये चीज़ तो हमारे ऋषियों ने हज़ारों साल पहले ही डिटेक्ट कर ली थी और उन्होंने इस ध्वनि को ॐ का नाम दिया था ताकि इसका हम जाप करें और जब हम जाप करते हैं तो उसी ध्वनि से रेजोनेट करते हैं और अपने ओरिजिन (मूल) तक पहुँचते हैं। उन्होंने ये भी कहा था कि अगर हमारे ऋषि ऐसा करते हैं तो वो इसे अंधविश्वास कहते हैं और अगर नासा करे तो वही साइंस (विज्ञान) हो गयी। तो कृपा इस पर प्रकाश डालें।
आचार्य प्रशांत: ये कह रहे हैं कि किन्हीं इंस्ट्रूमेंट्स (उपकरणों) के द्वारा कॉस्मोलॉजिकल रीसर्च (ब्रह्माण्ड सम्बन्धी अनुसंधान) करके कुछ गैलेक्टिक साउंड्स (आकाशगांगेय ध्वनियाँ) पकड़ी गयी हैं और उनको कह रहे हैं कि वो जो आवाज़ें आ रही हैं स्पेस (अन्तरिक्ष) में वो ॐ की ध्वनि जैसी हैं। तो बहुत सारे भारतीय लोग, धार्मिक लोग, बहुत ख़ुश हो रहे हैं और कह रहे हैं कि देखो यही बातें जब हम कहते हैं तो कह देते हो अंधविश्वास है पर अब तो नासा भी मान रहा है कि ये जो पूरा अंतरिक्ष है इसमें ॐ की ही ध्वनि गूँज रही है।
ॐ कोई ध्वनि नहीं होती, ॐ ध्वनि नहीं होती। ध्वनियाँ पशुओं के लिए होती हैं, मनुष्यों के लिए शब्द होते हैं और हर शब्द एक सूत्र होता है। ये अंतर समझिएगा साफ़-साफ़। हमारे लिए शब्द होते हैं और हर शब्द एक सूत्र, माने एक कोड



