
आचार्य प्रशांत: केंद्रीय बात क्या है?
श्रोता: हर एक नश्वर चीज़ों से, पदार्थों से, व्यक्तियों से हमारा नाता है, तो मृत्यु का भय तो रहेगा?
आचार्य प्रशांत: वो नाता जो है उसको सिर्फ़ नीति के आधार पर नहीं अनुचित ठहराया जा रहा। वो नाता भूल है। वो नाता होना ही…

आचार्य प्रशांत: जी, स्वागत है! बताइए।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार, सर। कल मेरी एक ऑनलाइन प्रतिभागी सोमेश जी से बात हो रही थी, तो मैंने पूछा कि आज की कार्यशाला के लिए उनका प्रश्न क्या है। एक अजीब-सी बात उन्होंने कही कि आचार्य जी ने गीता पर जो चर्चा करी है उससे…
भिन्न-भिन्न लोकों…
प्रश्नकर्ता: आत्मा और अहंकार ये सारी इंटेलेक्चुअल लेवल (बौद्धिक स्तर) पर समझ में आती हैं। लेकिन अनुभव के स्तर पर कहीं-न-कहीं हम इनको एक तरीक़े से मान रहे हैं, जान नहीं पा रहे अन्दर से कि हम आत्मा हैं। ये परिवर्तन कैसे हो?
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं समझना होता, जीना…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुझे कर्म में कोई विश्वास नहीं है, भक्ति में कोई श्रद्धा नहीं है। मुझे धर्म की कोई समझ नहीं है, तो परमात्मा की कृपा मुझ पर होगी या नहीं? परमात्मा से मेरा कभी साक्षात्कार होगा?
आचार्य प्रशांत: तो अभी जैसे भी हो तुम, उससे अगर संतुष्ट ही…

प्रश्नकर्ता: सर, क्या भक्ति सुमिरन है, क्या इसमें ध्यान लगाना चाहिए, भक्ति कैसे करनी है? कई लोग कहते हैं कि आप ध्यान में बैठोगे, वो भक्ति है; या आप सुमिरन कर लोगे, वाहे गुरु, वाहे गुरु जाप कर लोगे, वो है। आप राम-राम कर लो वो है या आप ओम्-ओम्…