प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। आप अपने दर्शकों के लिए आचार्य प्रशांत, मेरे लिए हमेशा प्रशांत।
आचार्य प्रशांत: हाँ, प्रशांत ही रहना भी चाहिए। सब बढ़िया है।
प्र: प्रशांत, बीस साल बीत गये, जब हम आइआइएम में पहली बार मिले थे।
आचार्य: जून दो-हज़ार-एक। जून-दो-हज़ार एक से अब दो-हज़ार-इक्कीस। बीस साल बीत गये हैं पलक झपकते बिलकुल। दुनिया काफ़ी बदल गयी।
प्र: बहुत बदल गयी है। मैं सोचता हूँ पिछले बीस साल में इतना बदलाव आया है, स्पेशली इन्फॉर्मेशन (मुख्यतया सूचना) को लेकर एक्सप्लोजन (विस्फोट) सा हो गया है और उस विस्फोट से जो ये नयी पीढ़ी आयी है, इस पर निश्चित रूप से कुछ-न-कुछ असर हुआ है।
आचार्य: बहुत ज़्यादा, बहुत ज़्यादा। जैसे कि ये नयी पीढ़ी खड़ी ही हुई है बिलकुल नये तरीक़े की मानसिक सामग्री पर, जो उसको इसी इन्फॉर्मेशन एज (सूचना का दौर) ने मुहैया करायी है। इनके पास बहुत अलग तरीक़े का मेंटल कंटेंट (मानसिक सामग्री) है, जो हमारी पीढ़ी के पास नहीं था और जो हमारी पीढ़ी के पास था, वो इनके पास नहीं है। बिलकुल ठीक कह रहे हैं आप।




