काश! मुझे थोड़ा समय और मिल जाता ('Time Management', 'Work-Life Balance') || आचार्य प्रशांत (2023)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मेरा प्रश्न टाइम मैनेजमेंट (समय प्रबंधन) को लेकर है और उसका जो एक छोटा भाई आता है वह है वर्क लाइफ़ बैलेंस (कार्य संतुलन)। तो कॉर्पोरेट और एकेडमिक दुनिया में यह बहुत चलता है कि टाइम मैनेज करो। इसका कोर्स भी होता है कि एक्सेल शीट पर लिखकर आप कैसे टाइम मैनेज कर सकते हैं।
तो मैं जब करने गया जैसे होता है, तो मैं पूरी तरह से कभी नहीं कर सका और हताशा भी बहुत रही। पिछले साल जब ज़रूरत पड़ी तो मैं अध्यात्म की ओर बढ़ा, सत्य की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो मुझे लगा कि ये जो टाइम मैनेजमेंट हम बोल रहे थे, वो बाइप्रोडक्ट (सह-उत्पाद) जैसा ही हो रहा है। मुझे अलग से कुछ करना नहीं पड़ रहा है। तो क्या अध्यात्म ही एक और एकमात्र उपाय है जिसमें हम टाइम मैनेजमेंट कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: देखिए, हू इज़ द मैनेजर? (प्रबन्धक कौन है?) टाइम मैनेजमेंट आप कह रहे हो। कौन है जो तय करता है कि समय का क्या उपयोग करना है?
आध्यात्मिक प्रश्न तो शुरू यहाँ से होता है न कि डूअर कौन है, कर्ता कौन है, मैनेजर कौन है? मैनेजमेंट की बात तो बाद में आएगी। हू इज़ द मैनेजर? कौन है जो टाइम मैनेजमेंट करेगा? वो आप हैं। और आप समय वहीं लगाएँगे जहाँ आपके मूल्य हैं। योर टाइम फॉलोज़ योर वैल्यूज़। अहम् जिस चीज़ को वरीयता देता है, सम्मान, मूल्य देता है उसी चीज़ को समय देता है, क्या बात एकदम सीधी नहीं है?


