फ़ायदेबाज़ हो गये हैं! बात-बात पर पूछते हैं कि फ़ायदा क्या है? फ़ायदा क्या है? कर लेंगे स्केचिंग, कोई बता दे कि फ़ायदा है। जहाँ वास्तव में तुम्हारा हित हो, जाओ न वहाँ पर। बहुत ध्यान दो इस बात पर कि हित किसको कहते हैं, हित कहाँ है, बहुत पूछो अपने आप से। फ़ायदे की एक परिभाषा ये होती है कि जब फ़ायदा हो गया, उसके बाद फ़ायदे की बहुत आकांक्षा बचती नहीं है। अगर फ़ायदा ऐसा हो रहा है तुमको जिसके बाद और फ़ायदे और फ़ायदे चाहिए, तो फिर अभी लाभ हुआ नहीं।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आचार्य जी, किसी का वास्तविक इंट्रेस्ट (रुचि) क्या है, अगर जानना है तो कैसे जाने? पहले मुझे डांसिंग (नृत्य) में इंट्रेस्ट था, स्केचिंग (चित्रकारी) में इंट्रेस्ट था। लेकिन अभी सिचुएशन (परिस्थिति) ऐसी हो गयी है कि मुझसे कोई पूछता भी है कि मेरा इंट्रेस्ट क्या है, तो आई एम वेरी कंफ्यूज्ड, आई डोंट नो (मैं बहुत ही संशय में होती हूँ, मुझे पता नहीं होता)। मतलब पहले था कि मैं स्केचिंग करती तो मुझे मज़ा आता था। लेकिन अभी मैं स्केचिंग भी करना चाहती हूँ, एक बार लगता है कि हाँ, चलो करते हैं। लेकिन फिर लगता है क्या फ़ायदा, कुछ होना तो है नहीं, इस तरह के थॉट्स (विचार) आते हैं। तो ये जो एक मतलब लेयर(परत) है, या क्या है आइ डोंट नो, कि मतलब क्या खुद से थोड़ा दूर हो गये हैं?
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं हो गये हैं, फ़ायदेबाज़ हो गये हैं! बात-बात पर पूछते हैं कि फ़ायदा क्या है? फ़ायदा क्या है? कर लेंगे स्केचिंग, कोई बता दे कि फ़ायदा है। हर स्केच में पाँच हज़ार, कर लेंगे, इतनी सी बात है।




