बस ये देखिए कि क्या है जो चुभ रहा है। उसको हटाना ही जीवन का उद्देश्य है। सबसे पहले देखो कि अभी क्या है जो तुम्हें तंग कर रहा है? उसी से आज़ाद हो जाओ यही उद्देश्य है और कुछ नहीं।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, किसी व्यक्ति को उसके जीवन का उद्देश्य कैसे पता चले?
आचार्य प्रशांत: आप जहाँ बैठे हो, वहाँ पीछे दीवार आपको चुभ रही हो। मान लीजिए दीवार में कील है। और आप बैठे हैं और दीवार की टेक ले रहे है और वह कील चुभ रही है। तो आपके लिए पर्पस ऑफ़ लाइफ़ (जीवन का उद्देश्य) क्या है ? क्या है पर्पस आपके लिए? कील को हटाओ या खुद हट जाओ। तो बस ये देखिए कि क्या है जो चुभ रहा है। उसको हटाना ही जीवन का उद्देश्य है।
अब मै इस कुर्सी पर बैठा हूँ और इसमें मुझे दस कीलें चुभ रही हों और मैं विचार करूँ कि जीवन का उद्देश्य क्या है। आह! और कील ससुरी घुसी जा रही है और मैं बैठकर के गहन आत्मविमर्श मे संग्लग्न हूँ कि जीवन का अन्तिम उद्देश्य क्या है, तो ये बात बेढंगी है।
भाई सबसे पहले देखो कि अभी क्या है जो तुम्हें तंग कर रहा है? उसी से आज़ाद हो जाओ यही उद्देश्य है और कुछ नहीं।
प्रश्नकर्ता: तंग करने वाली तो बहुत सारी चीज़े हैं जीवन में।




