जैसे आप, वैसा आपका संसार - दूसरों की शिकायत करना बंद करें || आचार्य प्रशांत (2024)

आचार्य प्रशांत: एक स्कूल था बच्चों का, छोटे बच्चे आते थे वहाँ एकदम। छोटे बच्चे आये वहाँ, खड़े हो और बड़े अपनेपन से और बड़े नाज़ से बोले, 'ये हमारा स्कूल है।' एक दिन वहाँ कुछ जंगली जानवर आ गये। उनको खबर मिल गयी थी कि यहाँ छोटे-छोटे बच्चे रहते हैं। छोटे, माँसल और असुरक्षित तो उन हिंसक जानवरों ने कहा कि ये भोजनालय है। यहाँ बढ़िया खाने-पीने का माल परोसा जाता है, स्वादिष्ट माँस, नर्म माँस बच्चों का।
वो जो स्कूल था उसकी इमारत एक ठेकेदार ने बनवायी थी और इमारत को आगे और बड़ा करने का, खड़ा करने का ठेका भी उसी ठेकेदार को मिला हुआ था। तो वो जब भी उस स्कूल के सामने से निकले तो बोले कि ये, ये जो है न, ये मेरा क्लाइंट है। क्या है? क्लाइंट।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार वो उस जिले में छोटे बच्चों के लिए खुलने वाला बयालीसवाँ स्कूल था। तो शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी उस स्कूल को कहा करें,'ये नम्बर बयालीस है, नम्बर बयालीस।' क्या है? नम्बर बयालीस है।
वो स्कूल क्या है? क्या वो स्कूल ही है जैसे छोटे बच्चे उसको देख रहे थे? या वो दावत का अड्डा है जहाँ नर्म माँस मिलने की सम्भावना है अगर हिंसक जानवर सही दाँव लगाकर, घात लगाकर, हमला कर पाएँ? या वो एक इमारत है? या वो एक क्लाइंट है? या वो नम्बर बयालीस है? वो क्या है? आप और भी तरीके से अनुमान लगा सकते हैं कि उस स्कूल को कैसे और लोग अलग-अलग तरीकों से देखते होंगे।
उस स्कूल में बिजली और पानी की भी आपूर्ति होती होगी तो बिजली विभाग और जल विभाग के रिकॉर्ड्स में, उनकी फ़ाइलों में, वो जो स्कूल है, ये एक नम्बर के तौर पर दर्ज़ होगा, ठीक वैसे जैसे शिक्षा विभाग के लिए ये नम्बर बयालीस है। उनके लिए भी ये कोई नम्बर होगा। ये सरकारी है स्कूल, इसके पास ही एक निजी, प्राइवेट स्कूल खुला। उनके लिए ये क्या है स्कूल? वो कहते हैं — ये हमारे लिए एक प्रतिद्वन्द्वी है, कॉम्पिटिटर है।

![क्या आप आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी [इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग] के भाग हैं?](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-3dc72262-a991-4f45-a9d4-a0397e21022c/30/image.jpg)




