इतिहास में बहुत गलत हुआ, ज़ालिमों ने बड़ी चोट दी' – अब बदला लेना है? || आचार्य प्रशांत (2022)

प्रश्नकर्ता: नमस्कार, आचार्य जी। जब मैं भारत का इतिहास पढ़ता हूँ, विशेषकर मुसलमान आक्रांताओं को लेकर। तो जो स्कूल में इतिहास पढ़ा था, वो देखकर मुझे ये लगता है कि काफ़ी कुछ दबाया गया। जैसे ब्रिज अंडर द कारपेट (सच्चाई छुपाना) बोलते हैं, वैसा किया गया।
तो अब ये देखने के बाद मेरे भीतर एक अपील रहती है। एक कम्युनल (साम्प्रदायिक) विचारधारा वाले लेखकों को, यूट्यूबर्स को, नेताओं को, इनकी ओर थोड़ा एक अट्रैक्शन टाइप (आकर्षण जैसा) का रहता है। आपको सुनने के बाद यह लगा कि वो लोग थोड़े शैलो (उथले) हैं। पर फिर भी आन्तरिक रूप से एक टर्मोयल(उथल-पुथल) जैसा रहता है कि कभी उनकी बात सही लगती है, कभी- कभार लगता है कि वो बहुत क्षुद्र बात कर रहे हैं, कंफ्यूजन(संशय) रहता है। तो एक कम्युनल माइंड के लिए सॉल्यूशन(समाधान) क्या होना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: देखो, बिलकुल सम्भव है कि अतीत में हिंदुओं पर अत्याचार हुए, वाक़ई हुए भी हैं, एकदम हुए।
प्रश्नकर्ता: उसके साथ डिनायल (इन्कार) का भी है, अभी उसको डिनाय करने की बहुत कोशिश...।
आचार्य प्रशांत: यह भी अत्याचार का ही हिस्सा है कि अत्याचार की घटना को दबाने की कोशिश की जाए। ठीक है। तो अत्याचार हुए, ये भी ग़लत हुआ आपके साथ, और अत्याचार के तथ्य को बहुत लोग अब दबा देना चाहते हैं, झुठला देना चाहते हैं, वो भी अत्याचार का ही हिस्सा है।









