जब अपनी ज़िंदगी का पता होता है तो दूसरों से ईर्ष्या नहीं होती। दूसरों से आप बहुत तुलना करना ही नहीं चाहते क्योंकि अब ‘me versus you’ नहीं होता, अब ‘me versus me’ होता है। दूसरे को देखकर आप एक प्रेरणा ले सकते हो, लेकिन उसकी जो तरक़्क़ी देखोगे, वो उसकी तुलना में देखोगे। हम गड़बड़ ये कर देते हैं कि उसकी तुलना अपने आप से करने लगते हैं, जबकि हर व्यक्ति की स्थिति और स्थान बिल्कुल विशिष्ट होता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। मेरा नाम ईशा है और मैं सी.ए. स्टूडेंट हूँ। सर, कुछ लाइन्स कोट कर रही हूँ मैं बुक में से: “जेलेसी इज़ बॉर्न फ्रॉम डिपेंडेंस। द वन हु इज़ नॉट डिपेंडेंट इज़ फ़्री ऑफ़ जेलेसी। द वन हु इज़ हिज़ ओन मास्टर कैन नॉट बी जेलेस। इफ़ यू वांट टू बी फ़्री ऑफ़ जेलेसी, सी क्लियरली व्हेयर यू आर लीनिंग ऑन अदर्स टू डिफ़ाइन योरसेल्फ।”
जैसे कि मैं अपनी बात करूँ तो जब भी मैं अपनी एज के विद्यार्थियों से मिलती हूँ तो मेरा क्या रहता है, जब मुझे उनके बारे में पता चलता है कि वो मुझसे किस-किस क्षेत्र में कितना आगे हैं। तो इसमें मेरी उन पर डिपेंडेंस नहीं है किसी चीज़ को लेकर, पर जेलेसी तो तब भी है। तो इस चीज़ को, मतलब समझ नहीं आ रहा कि लाइन्स क्या सजेस्ट कर रही हैं। जेलेसी और डिपेंडेंस का क्या रिलेशन है?
आचार्य प्रशांत: है भाई, डिपेंडेंस है।




