इंटरेस्ट सच्चा है या नहीं — यह जाँचने के लिए पूछो: “सिर्फ़ आकर्षित हूँ या समझता हूँ?” आप जो भी क्षेत्र चुनोगे, उसमें समय, ऊर्जा और ज़िन्दगी लगेगी। काम कोई छोटी चीज़ नहीं होती, बहुत क़रीबी चीज़ होती है। वह आपकी ज़िन्दगी का पहला रिश्ता होता है। जब काम समझदारी, गहराई और प्यार से चुनते हो, तो फिर यह नहीं होता कि हर छह महीने में जी ऊब गया।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मैं पॉलिटिकल साइंस सेकंड ईयर का छात्र हूँ। इसी से रिलेटेड मेरा एक सवाल था। मैं पॉलिटिकल साइंस ले लिया, उस समय मुझे पॉलिटिकल साइंस में काफी इंटरेस्ट था। लेकिन आपको सुनने के बाद मुझे पॉलिटिकल साइंस से अरुची टाइप हो गई है और साहित्य और दर्शन में काफी इंटरेस्ट आ गया है। तो क्या मुझे अपना कोर्स चेंज कर लेना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: जो कुछ बोल रहे हो अगर उसमें सच्चाई है तो बिल्कुल कर लेना चाहिए। लेकिन ये जो इंटरेस्ट है ना ये कई बार बड़ी फ्लिमज़ी चीज़ होती है। है सतही और फिकल, फिकल माने तो कोई बड़ा फैसला लेने से पहले जिसको तुम अपना इंटरेस्ट कह रहे हो उसकी गहराई जाँच लेनी चाहिए क्योंकि इंटरेस्ट उसका क्या है? लहर की तरह आते हैं या लहर की तरह गिर जाते हैं। पिछले पाँच सालों में देखो किस-किस चीज़ में तो इंटरेस्ट हुआ होगा। आज वो कोई चीज़ तुम्हें थाली पर सजा के भी दे तो तब भी ना लो। और जब वो इंटरेस्ट छाता है मन में तो ऐसा लगता है लहर बहा ले गई। बाप रे!




