आइ.आइ.टी की डिग्री, पर्वतारोहण का खिंचाव, मन मे द्वंद || आचार्य प्रशांत (2020)

प्रश्नकर्ता: मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूँ और बचपन से ही बहुत कम महत्वाकांक्षी रहा हूँ। खेल-खेल में ही मैंने जेईई का एग्ज़ाम क्रैक किया (परीक्षा उत्तीर्ण की) और आइआइटी खड़गपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (अभियान्त्रिकी) करने का मौका मिला।
इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में ट्रैकिंग (पर्वतारोहण) करने का मौका मिला और वहीं से इस बात की कहीं इच्छा उठी कि माउंटेंनियरिंग (पर्वतारोहण) ही मेरी कॉलिंग (मंज़िल) है।
पर इस बात की पुष्टि करने के लिए मैंने और मुश्किल ट्रैकिंग की, और मुझे ये बात क्लीयर (स्पष्ट) ही हो गई थी कि यही मेरी कॉलिंग है।
इंजीनियरिंग के चौथे साल में मैंने प्लेसमेंट (नौकरी पाना) में न जाकर बहुत जल्दबाज़ी में और घर वालों को बिना बताए एक स्टार्टअप (नया छोटा उद्यम) खोला लेकिन किसी कारणवश वो चल नहीं पाया।
फिर वापिस से सामाजिक दबाव के कारण यूपीएससी की तैयारी करने लगा। वहाँ चार-पाँच महीने मेहनत की, अच्छा भी लगा, बहुत कुछ जाना भी, लेकिन लगा कि बहुत कुछ हाइप्ड (सनसनीखेज़ प्रचार) है और कम फ्रीडम (आज़ादी) और मौका मिलेगा कुछ करने के लिए।



