ना ब्रह्म से मतलब, ना गीता से मतलब, ना उपनिषदों से मतलब। अंधविश्वासों से मतलब है, कुट्टू के आटे से मतलब है।
"क्या चबा रही हो भाभी?" कहेंगी, "ये फलाहारी लड्डू हैं।" ये फलाहारी लड्डू कौन-से होते हैं? अब यह धार्मिकता का प्रमाण दिया जा रहा है कि, "हम फलाहारी लड्डू चबा रही हैं रे!" यह भाभीजी धार्मिक होंगी कभी? पर पूरे मोहल्ले में धार्मिक कहलाती हैं।
कहो, "मीरा का कोई भजन?"
तो कहेंगी, "नहीं, मीरा का कोई भजन नहीं पता, बिलकुल नहीं पता।" "अच्छा! दादू साहब का कोई भजन बता दो। कबीर साहब का कोई भजन बता दो।"
"नहीं।"
"तो वहाँ वो जो महिला टोली में जाकर के तुम वो भजन गाती रहती हो, वह क्या है?"
बोलीं, "राजा इन्द्र ने बाल्टी मँगायी।" यह भजन है! ना सूर के भजन, ना मीरा के भजन, ना कबीर की याद, ना तुलसी की बात। ‘राजा इन्द्र ने बाल्टी मँगायी’, यह भजन है और यह भजन भी बॉलीवूड के किसी आइटम-नंबर की तर्ज़ पर गाया जा रहा है!




