जितनी जनसंख्या है, उसको बनाए रखना मूर्खता है। इसलिए जनसंख्या का गिरना ख़तरा नहीं, उत्सव की बात है। बड़े-बड़े कैपिटलिस्ट आबादी बढ़ाने की बात इसलिए करते हैं क्योंकि लोग कम हो जाएंगे, तो उनका माल कौन खरीदेगा? आने वाला समय आबादी का नहीं, बुद्धिबल का है, क्योंकि एक जगा हुआ व्यक्ति सौ सोते हुए लोगों पर भारी पड़ता है। इसलिए बधाई का पात्र वह नहीं, जिसके हाथ में बच्चा है, बल्कि वह है, जिसके हाथ में किताबें हैं।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा नाम दृष्टि है और आज मैं एक न्यूज पढ़ रही थी जिसमें कि यह कहा जा रहा था कि साउथ कोरिया जिसकी फर्टिलिटी रेट अभी ०.६ (पॉइंट सिक्स) रह गई है और २१०० तक उसके अस्तित्व पर संकट आ सकता है, जिसको रोकने के लिए सरकार फाइनेंसियल सपोर्ट वगैरह दे रही है और यह जो फर्टिलिटी रेट कम हुई है, इसका मेन कारण है कि वहाँ की जो यूथ है वो करियर ओरिएंटेड हो गई है और दूसरा और भी कई कारण है, जैसे कि वहाँ की लिविंग कॉस्ट महँगी है और इनकम इनइक्वलिटी है, तो इन सब के कारण सरकार कुछ फाइनेंसियल सपोर्ट दे रही है ताकि लोग बच्चे पैदा करें ज़्यादा।
यही सेम कंडीशन जापान, चाइना, यूरोप की कुछ कंट्रीज़, यूएस ये सब जगह पे देखने को मिल रहा है, जहाँ की फर्टिलिटी रेट गिरती जा रही है और वहाँ एजिंग पॉपुलेशन, डिक्लाइनिंग बर्थ रेट को लेकर चिंता है। चिंता है सरकार को, तो मेरा सवाल यह है कि जब क्लाइमेट चेंज जैसे बड़ी समस्या हमारे पूरे मानव जाति के अस्तित्व पर इतना बड़ा संकट है, उस समय यह फर्टिलिटी रेट और पॉपुलेशन बढ़ाने की कोशिश पर कितना ज़ोर देना चाहिए, मतलब कितना ध्यान देना ज़रूरी है, और यह जो हम मतलब आए दिन फर्टिलिटी रेट और रिप्लेसमेंट रेट जैसे फैंसी वर्ड्स यूज़ करते हैं, जिसको देखो सब यही यूज़ करके बोल रहा है कि अरे हम खत्म हो जाएँगें या फिर हमारा अस्तित्व मिट जाएगा तो इन सब वर्ड्स का क्या रेलीवेंस रह गया आज के टाइम पे?
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं रह गया। किसने कह दिया कि अभी जितनी जनसंख्या है, उसको बनाए रखना ज़रूरी है, बहुत मूर्खता की बात है, जनसंख्या गिर रही है तो ख़तरा नहीं है, यह तो उत्सव की बात है। किसने कह दिया कि अभी २०२४ में जो जनसंख्या कर ली है, उस जनसंख्या के आंकड़े में कोई जादू है, वह कोई खास विशिष्ट दैवीय आंकड़ा है और उसको बचा के रखना ज़रूरी है किसने कह दिया? गिर रही है तो अच्छी बात है, गिर रही है। बढ़ी कैसे थी यह देखो ना, बढ़ी ऐसे थी कि महिलाओं का अपने शरीर पर नियंत्रण ही नहीं था, उनको पकड़-पकड़ के प्रेगनेंट कर दिया जाता था, तो बढ़ गई थी।




