60–65% शेयर है इंडिगो का। आप इंडिगो को सज़ा दे दो, आप बोल दो ‘कल से इंडिगो की उड़ानें बंद,’ तो भारत की दो-तिहाई उड़ानें बंद हो जाएँगी। कौन-सी रेगुलेटरी अथॉरिटी अब इंडिगो को सज़ा दे सकती है? फ्लाइट कैंसल हो गई, तो जो पैसेंजर्स थे, उन्होंने क्रांति कर दी; ऐसे होती हैं क्रांतियाँ? जब जीवन में गीता आती है न, तो जीवन में गरिमा आती है। फिर इंसान कहता है कि ‘मैं आकाश हूँ। मुझे धरती पर ये तिलचट्टा और केंचुआ क्यों बनाया जा रहा है? मुझे मिट्टी में क्यों गाड़ा जा रहा है?’ फिर उठती है क्रांति, भीतर से।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा नाम सागर है। मैं पिछले डेढ़ साल से सत्रों से जुड़ा हुआ हूँ। मेरा सवाल जो है, वो हाल ही में इंडिगो एयरलाइंस में जो केऑस हुआ, उसके बारे में है। उस केस में हमने देखा कि कहने को तो नियम और कम्प्लायंस फ़ॉलो किए गए थे, लेकिन नुक़सान जो है, पैसेंजर्स को झेलना पड़ा। और ये इकलौता मामला नहीं है हर बार ऐसा ही होता है; और बाद में जो मैटर है वो कम्पेंसेशन और अपॉलजी के नाम पर निपटा दिया जाता है।
और ये चीज़, एविएशन हो, रेलवेज़ हो, या फिर कंस्ट्रक्शन, यहाँ तक कि एआई भी हो, जहाँ पर सिर्फ़ लोगों पर ही नहीं, एनवायरनमेंट पर भी इम्पैक्ट होता है। तो ऐसे में इन कंपनियों का या फिर जो सब्सक्राइब्ड सर्विस प्रोवाइडर्स हैं, अपने सब्सक्राइबर्स के प्रति, एनवायरनमेंट के प्रति कुछ तो एथिकल रिस्पॉन्सिबिलिटी होनी चाहिए। क्योंकि ये जानते हैं कि मामला बिगड़ने वाला है, फिर भी ये बिगड़ने देते हैं।




