तुम एक झूठी मान्यता में जीना चाहते हो कि इंसान बाय डिफॉल्ट होता तो अच्छा है, बस वो पावर उसको करप्ट कर देता है। पावर ने इंसान को नहीं करप्ट किया, इंसान पावर को करप्ट करता है। मौका देकर देखो, पूरी दुनिया की आबादी आ जाएगी एप्स्टीन फ़ाइल्स में। पर आप सारा दोष डाल दोगे व्यवस्थाओं पर, कुछ लोगों पर। बात उन व्यक्तियों की नहीं है। हमारी प्रजाति के मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की है — अहंकार। उसी डिफेक्ट को ठीक करने के लिए जो होता है, उसको बोलते हैं अध्यात्म, आत्मज्ञान।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, नमस्ते। मेरा सवाल एप्स्टीन फ़ाइल्स के ऊपर है, जो आज मीडिया में एक सनसनीख़ेज़ ख़बर बनी हुई है। एक साधारण-सा टीचर, उसका, यू नो, अंतरराष्ट्रीय सेक्स-ट्रैफिकिंग जैसे केसों में उसका नाम आने लगता है, और वो भी माइनर गर्ल्स वग़ैरह इसमें इनवॉल्व्ड हैं। हालाँकि केस 2006 से मीडिया की ख़बरों में है पर अभी तक भी उस केस की पूरी तरह से परतें खुल नहीं पाई हैं। अभी जनवरी के लास्ट में डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस ने कुछ सार्वजनिक किए हैं, कुछ उस केस से जुड़े हुए डॉक्यूमेंट्स। कोई 30 लाख के आसपास पेजेस जारी किए गए हैं, 2000 के आसपास कुछ वीडियोज़ हैं और कोई 1,80,000 के आसपास कुछ फ़ोटोग्राफ़्स जारी किए गए हैं। इसमें जिन लोगों के नाम केस में जुड़े हुए आ रहे हैं, काफ़ी रसूख़दार नाम हैं।
आचार्य प्रशांत: ये सब काफ़ी सारी बातें मुझे पता हैं। सवाल क्या है? कोई बहुत आनंद नहीं आ रहा न ये सारी काली कहानी सुनने में, तो इसीलिए सवाल पर आइए।




