प्रश्नकर्ता: पिछले दो दिन से मेरे को प्रश्न पूछने की इच्छा थी, पर पता नहीं क्या झिझक है, क्या डर है कि पूछ नहीं पा रहा था। पर आज तो जैसा वाक्या हुआ, उससे आज का प्रश्न थोड़ा वैलिड (वैध) भी हो सकता है।
मैं होटल से निकल रहा था चेक आउट कर के, यहाँ से छह किलोमीटर दूर होगा। तो रास्ते में मैंने देखा मेरे सामने एक गधा था। तो वो चल रहा है, वो चलने की कोशिश करे, वो फिर गिर जाए, वो गिरे मुँह के बल। मुझसे यह देख कर रहा नहीं गया। फिर उसकी स्थिति देखी, थोड़ी देर खड़ा रहा, तो फिर उसकी वैसी ही स्थिति थी। फिर उसके बाद मैंने अनमोल भईया को फोन किया, फिर उनसे गाइडेंस (सलाह) माँगी, तो वो बोलें कि तुम सर्च (खोज) करो कि गवर्नमेंट (सरकार) के जो वेटेरिनरी क्लिनिक (पशु चिकित्सा केंद्र) वगैरह होते हैं, उनके बारे में। सर्च किया तो उनके नंबर वगैरह अवेलेबल (उपलब्ध) नहीं थे गूगल मैप्स पर। एक था उसका इनवैलिड (अवैध) बता रहा था। फिर कोई प्राइवेट (निजी) वेट (पशु चिकित्सक) है उसको कॉल किया, उसने बताया कि 'एस. पी. सी. ए. करके कुछ होता है, उनका काम यही है, तो आप उनको फोन करो।' उनको फोन किया, फिर उधर भी बहुत, ये नंबर फिर वो नंबर, कर-करके फाइनल (आख़िरी) नंबर मिला। फिर उनसे बात हुई वो बोले कि, हम इधर-इधर हैं, टाइम (समय) लगेगा थोड़ा, दो घंटा लगेगा, बताया उन्होंने। बहुत रिक्वेस्ट (आग्रह) की कि आप आ जाइए, मुझे नहीं लगता कि यह ज़्यादा बचेगा।
फिर वहाँ पर जब बच्चें आएँ जो पास में रहने वाले, पानी-वानी मँगवाया मैंने, पानी वो पिया नहीं। तो जो बच्चें आएँ, एक बच्चा था उसने बताया। मैंने पूछा कि यह क्या है? तो वो बोले, उनका मालिक है उसके पास दस-पंद्रह गधे हैं। वो रोज़ इनको यहाँ चराने के लिए लेकर आता है। क्या करता है, कि एक गधे को दूसरे गधे से बाँध देता है, पैरों को। मोटी रॉड रहती है लोहे की, उससे उनको मारता है और बहुत ज़ोर से मारता है। बताया कि जो




