चुड़ैल मुर्गी चुराती पकड़ी गई || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्यजी। शत्-शत् नमन। मेरा नाम जगदीश है। मैं उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद से आया हूँ। आचार्य जी, मेरा प्रश्न बली प्रथा से है संबंधित है। मैं जिस समाज में रहता हूँ, वहाँ सदियों से बली प्रथा होते आ रहा है और वहाँ पर एक गहरी श्रद्धा और आस्था उन लोगों ने बली प्रथा पर बना दिया है। तो आचार्य जी, जो पूजा करने का तरीका है, इसमें क्या होता है कि जो भी देवताओं का पूजा किया जाता है, वो एक स्त्री या पुरुष के रूप में आता है। मैंने बचपन से अपनी आँखों से होते हुए देखा है। प्रत्यक्ष अपनी आँखों से होते हुए देख रहा हूँ मैं।
तो आचार्य जी, मुझे यह चीज़ समझ में नहीं आती है। मैं लोगों को कहता हूँ कि ये चीज़ गलत है तो वो मुझे कहते हैं, “तू कौन होता है कि हमारे देवी या आस्था पर चोट करने वाला? तू बेकार आदमी है या तू पागल है।“ ऐसा मुझे पूरा समाज कहता है लेकिन जो भी मैं यह शक्ति अपनी आँखों से देखता हूँ तो मुझे भी लगता है, संशय रेहता है कि है क्या यह चीज़। इसमें मैं हमेशा दुविधा में रहता हूँ। कृपया इस पर मार्ग दर्शन दीजिए।
आचार्य प्रशांत: क्या मार्गदर्शन दूँ मैं? पुरुष या नारी के रूप में आता है, माने क्या आता है?
प्र१: पुरुष और नारी के शरीर में अजीब कंपन टाइप सा आता है और वो अपना पूरा-पूरा माहौल बदल देते हैं।
आचार्य: ठण्ड लग गई होगी। पहाड़ों का मामला है।
प्र१: नहीं जी! हमने देखा है बचपन से।









