तो जो लोग इस बच्ची के देह पर या शक्ल पर अभद्र टिप्पणियाँ कर रहे हैं, उनको पता भी नहीं है कि उनकी उन टिप्पणियों का स्रोत क्या है। इसलिए उठ रही है क्योंकि तुम्हारे घरों में, गली-मोहल्लों में और शहरों में, वास्तव में स्त्रियों के लिए कोई ऊँचा स्थान नहीं है। तुमने उनको यही बना रखा है, घर की सजावट की चीज़ें, घर का सेवक और ये मत कहिएगा ये पुरानी बात है। आज भी बहुत सारे धर्म गुरु और कथा वाचक जो बातें कहते हैं उसमें सुनिए कि महिलाओं के लिए क्या संदेश रहता है कि अगर महिला ने पति की थाली में खा लिया तो पति मर जाएगा या उसे कुछ हो जाएगा। लेकिन पति की जूठी थाली में अगर महिला खाएगी तो स्वर्ग पाएगी और पति के अगर पाँव दबाएगी तो घर में लक्ष्मी आएगी। अगर उसे पति के पाँव ही दबाने है तो बोर्ड टॉप करके क्या कर लेगी!
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: सर अभी दो दिन पहले यूपी बोर्ड (उत्तर प्रदेश परीक्षा मंडल) का रिज़ल्ट (परिणाम) घोषित हुआ है तो उसमें एक छात्रा हैं जिन्होंने यूपी बोर्ड टॉप (शीर्ष) करके देश का नाम रोशन किया है, तो ये तो एक गर्व की बात है। लेकिन एक शर्मनाक बात ये देखने को मिल रही है कि हमारे ही समाज के लोग जहाँ पर भी उनकी ये बात कही जा रही है उसी के नीचे अगर कमेंट देखें या टिप्पणियाँ देखें तो वो काफ़ी फूहड़ सी टिप्पणी हैं और वो टिप्पणियाँ उनके देह को लेकर है अधिकतर कि उनके चेहरे पर बाल उग गये हैं या मूँछें उग आई हैं, तो इसको लेकर है।
और मैं कुछ दिन पहले के सत्र को अगर याद करूँ तो आपने सानिया मिर्ज़ा का उदाहरण दिया था कि वो खेल में अच्छा प्रदर्शन कर रही थीं लेकिन लोगो का ध्यान उनके खेल में न होकर उनके भी देह की तरफ़ था और वो उनके जिस्म को लेकर बात करते थे। तो इधर एक छोटी बच्ची है, उन्होंने मेहनत की है और उनकी मेधा का सम्मान न करते हुए हम लोग उनके भी देह को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं। तो मैं ये जानना चाह रहा था कि हमारा समाज किस ओर बढ़ रहा है और हमें कैसे एक सही दिशा मिल सकती है कि हम कम-से-कम उत्कृष्टता का और उनकी मेहनत का सम्मान कर पाएँ।




