भगवान बुद्ध महल छोड़ कर जंगल क्यों गए? || आचार्य प्रशांत (2018)

प्रश्नकर्ता: भगवान बुद्ध महल छोड़कर जंगल क्यों गये?
आचार्य प्रशांत: वो जंगल की ओर नहीं गये थे, वो समाज से दूर गये थे। अन्तर समझना। बुद्ध को यह भ्रम क़तई नहीं था कि उन्हें जंगल में बोध मिल जाएगा। पेड़ पर थोड़े ही बोध लगता है! पेड़ पर बोध लगता होता तो कौवों को सबसे पहले मिल गया होता। और घास में बोध होता तो बकरियों को, गायों को सबसे पहले मिल गया होता। तो बुद्ध को यह भ्रम तो नहीं था कि जंगल में मिल जाएगा।
वो जंगल क्यों गये थे? जंगल इसलिए गये थे क्योंकि उन्हें महल से दूर होना था। इन दोनों बातों का अन्तर समझना। जंगल से नहीं उन्हें उम्मीद थी कि जंगल में बोध-वर्षा होगी। महल से दूर हो गये थे, महल में बड़ी किच-किच थी। याद करो वो शाम जब बुद्ध को स्पष्ट हो गया था कि अब जाना ही है।
कहाँ को जा रहे थे बुद्ध? बुद्ध जा रहे थे युवा-उत्सव की ओर। राजधानी में युवा-क्रीड़ा का आयोजन हुआ था। एक युवक-उत्सव था, जिसमें देशभर के जवान लोग आते थे, खेल होते थे, क्रीड़ाएँ होती थीं, प्रतिस्पर्धाएँ होती थीं, तमाम तरीक़े के मनोरंजक और उत्तेजक कार्यक्रम होते थे। तो बुद्ध उसमें जा रहे थे। शायद, मुख्य अथिति रहे होंगे, फीता काटने जा रहे होंगे, या देखने जा रहे होंगे, कुछ भी। और सामने कौन पड़ गया?
श्रोता: वृद्ध।
आचार्य: वृद्ध। लो! और बुद्ध की किस्मत! उनका सारथी भी वैसा ही, बुद्ध ही जैसा। दो-चार बातें हुईं, फिर आगे बढ़े। अब क्या दिख गया?






