बेचारी आत्मा, जो भूत बन गई (कमज़ोर दिल वाले न देखें) || आचार्य प्रशांत (2023)

भाषा हमें बहुत सारे देती है नाम। और ये जो सारे नाम हैं, ये हमें भरोसा दिला देते हैं कि अपूर्ण अहंकार, पूर्ण हो सकता है। ‘इस नाम से बात नहीं बनी तो उस नाम से बात बनेगी; तो उस नाम से बात बनेगी, तो उस नाम से बात बनेगी। अरे! आत्मा से बात नहीं बनी, मैं वैदिक धर्म में था। चलो! बुद्ध की ओर चलते हैं, अनात्मा से बात बन जाएगी।’ और इस पूरी प्रक्रिया में ये बात छुपी रह गयी कि जिसकी बात बनाना चाह रहे हो। वो अपनेआप ही बिगड़ी हुई बात है। उसकी बात कभी बन ही नहीं सकती।
आप ये तो देख गये कि आत्मा से बात नहीं बनी, वेद काम नहीं आये। अब बुद्ध कोई नयी बात बता गयें हैं — 'अनात्मा'। ‘चलो! ज़रा जाते हैं संघ की ओर। वो घूम रहा है हाँ भाई! भिक्षु बताना तुम्हारा क्या है? तुम तो वही हो न, जो उपनिषद् पढ़कर के आ रहा था। अब तुम ‘धम्म पद’ पढ़ लोगे तो क्या फ़र्क पड़ जाएगा। तुम तो वही हो न!’
देखो! दो नामों में भेद करके तुमने अहंकार और सत्य का जो भेद था कितनी आसानी से स्वयं को भुलवा दिया। तुम्हें लगा, ‘देखो, कुछ नया मिल गया न! ‘उपनिषद्’ से ‘धम्मपद’ पर आ गये। कुछ नया हो गया।’ कुछ नया क्या हुआ? जो आया है वो तो वही है। ये भाषा का काम है — आपको झूठी आस देना। आपको लगता है कि कुछ नया आ गया जीवन में। समझ में आ रही है बात ये?
जो नया आया है न, बस वो नाम से नया है। नाम से नया है। वो न सिर्फ़ पुराना है बल्कि समूची प्रकृति का प्रतिनिधि है। तो कुछ नया आया ही नहीं है। पहले भी वही पुरानी प्रकृति थी जिसके सामने अहंकार खड़ा हो गया था, हथेली फैलाकर के। अभी भी वही पुरानी प्रकृति इसके सामने अहंकार खड़ा हो गया है, हथेली फैलाकर के। बस अहंकार एकदम बुद्धू है, पगलू सा। तो पहले वही जैसे- ‘अन्धों का हाथी’ कहानी नहीं है! तो पहले हाथी की सूंड के सामने खड़ा था। अब हाथी की पूँछ के सामने खड़ा है। दोनों को अलग-अलग क्या नाम दे दिये — ‘सूंड’। बोला! फिर ‘पूँछ’ बोला! हाथी के टुकड़े कर दिये। क्योंकि इतना बड़ा हाथी, वो छोटू की पकड़ में आता ही नहीं। तो छोटू ने क्या करा? हाथी को बना दिया — ‘ये सूंड है, ये पूँछ है, ये कान है, ये टाँग है, ये पेट हैं, ये पीठ हैं, ये आँख हैं, ये दाँत हैं।’ और अब अपनेआप को बोल रहा है, ‘देखो! ज़िन्दगी में नयी-नयी चीज़ें आ रही हैं मेरे। और एक चीज़ से अगर बात नहीं बन रही तो ज़रूर किसी नयी चीज़ से बात बन जाएगी।’






