बड़ा मुश्किल है सच को जिताना || आचार्य प्रशांत, उत्तर गीता पर (2020)

आचार्य प्रशांत: दानं व्रतं ब्रह्मचर्यं यथोक्तम ब्रह्मधारणम्। दमः प्रशान्तता चैव भूतानां चानुकम्पनम्॥॥
दान, व्रत, ब्रह्मचर्य, शास्त्रोक्त रीति से वेदाध्ययन, इन्द्रियग्रह, शान्ति, समस्त प्राणियों पर दया।
संयमश्चानृशंस्यं च परस्वादान्वर्जनम्। व्यलीकानामकरणं भूतानां मनसा भुवि॥॥
चित्त का संयम, कोमलता, दूसरों के धन लेने की इच्छा का त्याग, संसार के प्राणियों का मन से भी अहित न करना।
मातापित्रोश्च शुश्रूषा देवतातिथिपूजनम्। गुरु पूजा घृणा शौचं नित्यमिन्द्रियसंयमः॥॥
माता-पिता की सेवा, देवता, अतिथि और गुरुओं की पूजा, दया, पवित्रता, इन्द्रियों को सदा क़ाबू में रखना।
प्रवर्तनं शुभानां च तत्सतां वृत्तमुच्यते। ततो धर्मः प्रभवति यः प्रजाः पाति शाश्वतीः॥॥




