प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा प्रश्न बच्चों के परवरिश के संदर्भ में है। जैसे हमेशा से कहा जाता है कि एक बच्चे की परवरिश में उसके माता और पिता दोनों की ही बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। और अगर दोनों में से कोई एक पैरेंट (अभिभावक) भी अगर अनुपस्थित है, तो बच्चे में बहुत बिहेवियरल इश्यूज (व्यवहार सम्बन्धी मुद्दे) पाए जाते हैं।
और इसका समर्थन करने के लिए वेस्टर्न साइकोलॉजी (पश्चिमी मनोविज्ञान) में भी बहुत सबूत हैं कि अगर एक भी अभिभावक अनुपलब्ध है तो बच्चों की पर्सनैलिटी (व्यक्तित्व) अच्छी तरह से नहीं होती है। उनमें बहुत ज्यादा रिसेंटमेंट (रोष) पाया जाता है। बहुत लो कॉन्फिडेंस होते हैं , बहुत इंटिमिडेटिंग पर्सनैलिटी (डराने वाला व्यक्तित्व) होती है। तो मेरा प्रश्न यह है कि एक पिता के अभाव का एक बच्चे के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है?
आचार्य प्रशांत: आप कुछ समझ भी रहे हैं हम यहाँ क्या बातें कर रहे हैं? कुछ भी समझ रहे हैं? अर्जुन अपने पिता के साथ कितने साल रहे थे? अर्जुन के पिता कौन थे?
श्रोता: पांडू।
आचार्य: उनका क्या हुआ था? आप बोल रही हैं कि वेस्टर्न रिसर्चर्स (पश्चिमी शोधकर्ताओं) ने बताया है कि माँ और बाप होते हैं तब बच्चा अच्छा बढ़ता है। अर्जुन को अच्छा, माँ-बाप बना रहे हैं? कौन बना रहा है? बच्चे को माँ-बाप चाहिए कि कृष्ण चाहिए? अर्जुन के पास बाप थे? अर्जुन के पास बाप थे क्या? तो? युधिष्ठिर धर्मराज हो गये, बाप थे उनके पास?




