प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, मैं भावना हूँ। और अक्टूबर दो-हज़ार-तेईस (2023) से गीता सत्र के साथ जुड़ी हुई हूँ। और मेरा अट्ठारह साल का बेटा है और एमबीबीएस फ़र्स्ट ईयर में है। जब वो हॉस्टल में गया, हॉस्टल में जाने से पहले दो-तीन साल कोविड के चक्कर में वो बिलकुल अकेले घर में था, सिंगल। और हॉस्टल में वो एडजस्ट नहीं हो पाया और बीमार भी पड़ गया। तो और थोड़ा उसको एंग्ज़ायटी, डिप्रेशन जैसा फ़ील होने लग गया। तो उसने कहा कि मैं अकेले नहीं रह पाऊँगा हॉस्टल में, कोई भी घर का बन्दा मुझे साथ चाहिए ।
तो मैं उसकी स्थिति को देखते हुए मैं उसके साथ शिफ़्ट हो गयी जहाँ उसका कॉलेज था। और इस माइंडसेट के साथ कि चलो पाँच साल मैं उसके साथ ही रहूँगी। और सच कहें तो मैं भी यही सोचकर आयी कि पाँच साल शान्ति का मिलेगा, मैं अपने लिए उस पर कुछ सोचूँगी, करूँगी। ये सोचकर के भी एक तरह से मैं आयी। यहाँ आने के बाद पहले से तो वो बहुत बेटर है। कॉलेज में अब फ़्रेंड्स हो गये हैं, कॉलेज क्लासेज़ करता है, इग्ज़ाम देता है। अब वो कॉलेज से बहुत हैप्पी है लेकिन मेरे से वो बहुत परेशान है कि क्यों आ गयी, अब तुम जाओ, तुम्हारी ज़रूरत नहीं है, मुझे फ़्रेंड्स मिल गये हैं। लेकिन इस दौरान मैंने नोटिस किया है कि इंटरफेअरेंस (दखलंदाज़ी) बढ़ने का रीज़न है कि उसका वज़न ज़्यादा है, तो अपने वज़न को लेकर वो हमेशा बहुत परेशान रहता है कि मैं मोटा हूँ इसलिए मुझे कोई पसन्द नहीं करता है— एक तरफ़ तो वो रहता है। और दूसरी तरफ़ वो अन्धाधुन्ध खाना, खाने में कोई परहेज़ नहीं, कोई एक्सरसाइज नहीं करना।
अभी रिसेंट्ली मुझे पता चला है वो सिगरेट्स भी पीने लग गया है। इंटरनेट, मोबाइल, सीरीज़, मूवीज़ सब में पूरा, इग्ज़ाम के समय थोड़ा-बहुत पढ़ लेता है। अदरवाइज़ (अन्यथा) उन चीज़ों में ही बस लगा रहता है। तो मैं इन्हीं चीज़ों में मैं उनको रोकती हूँ।
आज नौ बजे वो मेरे से लड़ाई करके पता नहीं कहाँ चला गया है। और ये आपके सत्र का और श्रीमद्भगवद्गीता की अनुकम्पा है कि मैं अभी रात के बारह बज रहे हैं वो कहाँ होगा। लेकिन ‘मैं’ अभी तक तो बिलकुल काम-कम्पोज़्ड (शान्त), सब ठीक था। मेरे से जो हो सकता था मैंने किया है, मैंने पुलिस में जाकर के इन्फ़ॉर्म कर दिया है, उसके दोस्तों को बता दिया है, आसपास के पार्क में देख लिया है। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि वो मेरे से परेशान है मैं बहुत ज़्यादा इंटरफेयर कर रही हूँ। तो कहाँ तक, कहाँ तक




