बाबा कोबरा, और कालसर्प दोष || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम सर, मैं करीब पन्द्रह साल की थी, जब मेरे मम्मी-पापा ने एस्ट्रोलॉजर (ज्योतिषी) से मेरी कुंडली बनवायी थी। जिसमें मुझे पता चला था कि मुझे कालसर्प दोष है। तो उसको लेकर फिर काफ़ी रुद्राभिषेक भी हुए, मासिक शिवरात्रि को भी मन्दिर गये थे, मेरे मम्मी-पापा। उस वक्त तो मैं स्कूल में थी तो मैंने ज़्यादा इस पर ध्यान नहीं दिया। जितना हो पाया वो सब करवाया।
तो मैंने दो-तीन जगह पूछा, जहाँ से भी ये बात उठी। लेकिन मुझे कुछ वैसा उत्तर मिला नहीं एक्ज़ैक्टली (बिलकुल सही) कि ये होता क्या है? और इसका प्रभाव क्या पड़ता है? अभी मैं जॉब ही कर रही हूँ तो कहीं-कहीं पर अगर कुछ ऐसा किसी तरह का समस्या आती है तो मुझे लगता है कि इसी वजह से हो रहा है कि मेरी ग़लती भी है। तो मुझे एक्ज़ैक्टली इसका कान्सेप्ट (अवधारणा) समझना है कि ये है क्या? और ये क्या कुछ कर रहा है या हम जो अपने से कर रहे हैं, हमारी ग़लती का नतीजा है कि हमें किसी चीज़ में सफलता नहीं मिल पा रही?
आचार्य प्रशांत: कुछ हो तो समझाऊँ कि कुछ होता है। पूछ रही हैं, ‘क्या होता है?’ जो चीज़ है ही नहीं, उसके बारे में क्या बताऊँ कि क्या होता है? आप पूछें ये (मग को हाथ में लेकर दिखाते हुए) है। इसके बारे में बताइए क्या है? कौनसी धातु का है? कितने वज़न का है? कितना बड़ा है? तो कुछ बताऊँ भी। आप कहें, ‘ये (मेज़ पर खाली जगह पर इशारा करते हुए) जो यहाँ पर रखा हुआ है न प्याला, इसके बारे में कुछ बताइएगा?’ काल प्याला दोष! (श्रोतागण हॅंसते हैं) मैं खोज रहा हूँ, है कहाँ पर? कुछ हो, तो न बताऊँगा।
प्र: ये बहुत लोगों से सुना है, मतलब एक टर्म जैसा हो गया है।
आचार्य:



