प्रश्नकर्ता: सबको प्रणाम। आज की इस धर्म चर्चा में आपका स्वागत है। आज हमारे बीच में एक ऐसी विभूति या कहें शख्सियत आचार्य प्रशांत जी हैं। आपके बारे में मैं थोड़ा सा बताना चाहूँगा। आप बहुत ही ज्ञानी और पढ़े-लिखे एक आचार्य हैं। इन्होंने आइआइटी से इंजीनियरिंग की, आइआइएम से एमबीए किया, सिविल सर्विसेज़ की परीक्षा भी पास की। फिर बिज़नेस में भी कुछ संस्थाओं की मदद की। परन्तु फिर भी जो जिज्ञासा आपके मन में शायद बचपन से ही वेदों के प्रति थी, उनके बारे में शोध के करने के बारे में, धर्म के बारे में जानने की रही होगी, उसके कारण आज आचार्य जी पूर्णकालिक रूप से धर्म की सेवा करने में रत हैं, लगे हैं; देश और समाज को तथ्यों के आधार पर एक मार्गदर्शन देते हैं।
ऐसे आचार्य जी का, आपका स्वागत है। हम आपके बहुत आभारी हैं।
आचार्य जी, ये प्रश्न बहुत से लोगों के मन में आता है कि असली धर्म क्या है। और बहुत से लोग एक ही परिवार में रहते हुए भी, कोई किसी प्रकार की साधना करता है, कोई किसी प्रकार की पूजा करता है, कोई कुछ करता है। तो बहुत दुविधा है लोगों के मन में कि सच्चाई, धर्म की सच्चाई क्या है?
आचार्य प्रशांत: इतने तरह के जीव होते हैं, मनुष्यों के अलावा भी करोड़ों-अरबों प्रजातियाँ हैं, लेकिन उनके सन्दर्भ में हम कभी भी ‘धर्म’ शब्द की बात नहीं करते। तो पहली चीज़ तो हम ये ग़ौर करते हैं कि धर्म जो कुछ भी है, लागू सिर्फ़ मनुष्य पर होता है।
प्र: बिलकुल ठीक।
आचार्य प्रशांत: शेर के लिए, हिरण के लिए, पेड़-पौधे के लिए या हवा के लिए, पानी के लिए धर्म शब्द बेतुका हो जाएगा,







