अपना दृष्टा होने का मतलब ये होता है कि मैं बस देखूँगा कि मैं कितना बिगड़ा हुआ हूँ। सुधारने का मेरा कोई इरादा नहीं है, कोई इरादा नहीं है। इरादा लेकर के जो ख़ुद को देखेगा, वो फंस गया। परपज़लेस, पूरे तरीक़े से परपज़लेस होना चाहिए आत्म-दर्शन, आत्मवलोकन।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आपने अभी बताया कि कर्ता कभी नहीं बदलता। यदि कर्ता कभी नहीं बदलता और कर्म भी दोहराए ही जाते हैं, तो ग्रीक फिलॉसफ़र हेराक्लिटस के इस कोट का क्या अर्थ है — “ए मैन नेवर स्टेप्स इन द सेम रिवर ट्वाइस। फॉर इट्स नॉट द सेम रिवर एंड हीज नॉट द सेम मैन।”
आचार्य प्रशांत: हाँ तो रिवर भी बदल गई और मैन भी बदल गया, पर स्टेपिंग थोड़ी बदल रही है। ये तो हेराक्लिटस भी कह रहे हैं, ना कि “द मैन कीप्स स्टेपिंग इन द रिवर।” इट जस्ट़ दैट द रिवर हैज़ चेंज्ड और द मैन हैज़ चेंज्ड, बट हैज़ द स्टेपिंग स्टॉप्ड? हो गया।
वो जो वृत्ति है, रिवर क्या है? प्रकृति की धारा, जिसमें सब लगातार बदलता हुआ दिखाई देता है। मैं कौन हूँ? अहंकार, और मैं भी अभी किस विषय से जुड़ा हुआ हूँ, इससे जुड़ा हूँ, इससे जुड़ा हूँ, वो सभी बदलता रहता है। यही तो मूल माया होती है न, कि लगता है कि इस बार का प्रयत्न नया है। प्रयत्न नया होता तो तुम नदी में फिर से काहे को कूदते बेटा। पिछली बार नदी में कूदे थे कि नदी में तुम्हें मोती दिखाई दे रहे थे। ठीक है? तो तुम तब कौन थे? मोती-कामी। जिसको मोती की लालसा है।




