प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, धर्म के किस्से-कहानियों में एक नायक की तरह, एक सर्व शक्तिमान वीर या ज्ञानी की तरह बार-बार अवतारों का उल्लेख आता है। अवतार का क्या मतलब होता है? नरसिंह अवतार ने प्रहलाद को बचाया, वामन अवतार छोटे थे, बौने थे, परशुराम क्रोधित रहते थे, मत्स्य अवतार मछली थी तो जिस तरीके से अवतारों का निरूपण है, उसमें भी बहुत विविधता है। श्रीराम हैं, श्रीकृष्ण हैं, इनसे तो हम परिचित हैं हीं। तो अवतार मतलब क्या?
आचार्य प्रशांत: सबसे पहले यह समझना पड़ेगा कि हम कौन हैं। हम यह जान जाए कि हम कौन हैं, तभी तो यह समझ आएगा न कि अवतार कौन है; क्योंकि अवतार तो कोई विशेष है, कोई ख़ास है। अवतार अगर विशेष है तो वो विशेष जो हम साधारण जन मानस हैं, हमारी पृष्ठभूमि में ही है न विशेष वो। हम जैसे हैं, हमारी पृष्ठभूमि में ही अवतार कुछ अलग है, कुछ विशेष है। तो हम कैसे हैं? हम वो हैं जिनका मन उनकी आत्मा से अलग हस्ती बनाकर के जीता है।
अभी बिलकुल सरलता से समझा दूँगा, पहले इस बात को थोड़ा-सा समझेंगे। हम वो हैं जिनका मन आत्मा से बिलकुल अलग हस्ती बनाकर जीता है; और मन माने क्या? मन माने हमारी सब धारणाएँ, हमारे सब भ्रम, हमारी सब मान्यताएँ, हमारे सब झूठ; उसको क्या बोलते हैं? मन। मन माने वो सबकुछ जो हमने मान रखा है, उसको बोलते हैं- मन। मन काल्पनिक है, मन बस एक मान्यता है। ठीक है न?
हम किसमें जीते हैं? मन में। हम जीते हैं मन में इसीलिए फिर हम जीते हैं झूठ में। और आत्मा माने क्या? आत्मा माने सच्चाई। आत्मा माने वो चीज़ जिसको कितना भी जाँच-परख लो, तुम्हें अगल-अलग परिणाम नहीं मिल सकते। आत्मा माने कुछ ऐसा जो समय के साथ बदल नहीं सकता, आत्मा माने कुछ ऐसा जो तुम्हें कभी धोखा नही देगा, जो अपने अलग-अलग चेहरे या रंग कभी नहीं दिखाने वाला। और मन माने क्या? जो लगातार अपने रंग बदलता रहता है, जिसका कभी कोई भरोसा नहीं किया जा सकता, जो कभी एक जगह पर टिकता नहीं; और उससे बिलकुल विपरीत आत्मा है।
आत्मा वो, जो चीज़ बदल नहीं सकती। आत्मा वो जिसके आगे कुछ और नहीं है, जहाँ पर जाकर के सारी खोज़ सारी सोच, सब समाप्त हो जाती है, उसको बोलते हैं- आत्मा। और मन क्या है? जो लगातार खोज़ और सोच में ही लगा रहे, उसे बोलते हैं- मन। मन क्या है? जो लगातार बेचैन रहे और डरा हुआ रहे, उसको बोलते हैं- मन। और आत्मा क्या है? जहाँ पर चैन-ही-चैन है, शांति-ही-शांति है, आनंद है बिलकुल, वो है आत्मा।










