इतिहास में जो बड़े-से-बड़े नरसंहार हुए हैं, उनमें से न जाने कितने बस इसी बात पर हुए हैं कि तू अपना धर्म परिवर्तन कर, और मान कि मेरा धर्म सच्चा है। नहीं तो मैं तेरे गाँव में आग लगा दूँगा, तुझे मार दूँगा, महिलाओं का बलात्कार कर दूँगा, सारी संपत्ति लूट लूँगा। ये सब करूँगा। ये सब क्यों? क्योंकि तू मेरी बात नहीं मानता, तू काफ़िर है। क्या है ये? मान्यता का मतलब ही है हिंसा। जहाँ मान्यता होगी, वहाँ हिंसा होगी ही होगी। मान्यता है तो हिंसा है।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा सवाल जो है, हाल ही में कुछ हुए हादसों के रिलेटेड है। जो अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जो सिडनी में हुआ था, बॉन्डी बीच में जो मास फायरिंग हुई थी। और इन केसेस में, एटलीस्ट अमेरिका वाले केस में तो पता नहीं चला उनके बैकग्राउंड के बारे में, बट सिडनी के केस में वो जो दो व्यक्ति थे, बाप-बेटे, वो सालों से मतलब ऐसे आम लोगों की तरह ही जी रहे थे।
वैसे बहुत सारे केसेस आजकल देखने को मिल रहे हैं जहाँ पर ऐसा लगता है कि ये लोग हम जैसे आम लोगों की तरह ही जी रहे होते हैं, बट पता नहीं इनके अंदर ऐसे क्या चल रहा होता है। इनके अंदर की ऐसी मूल भावना क्या होती है जो ऐसे कदम उठा लेते हैं, जो ऐसे हमें लगता ही नहीं कि ऐसा व्यक्ति कर सकता है। तो मैं इन लोगों की मानसिकता के बारे में समझना चाहता हूँ।
आचार्य प्रशांत: कितनी अच्छी बातें कर रहे थे, तुम क्या पूछ रहे हो। टिंडर बॉक्स समझते हो क्या होता है? क्या होता है?




