हम चाहते हैं कि दुनिया की टॉप कंपनी का नाम, ब्रांड, उसकी पर्क्स-प्रिविलेजेस भी मिल जाए, और साथ ही बिल्कुल साफ़ काम करने की संतुष्टि भी मिल जाए। अगर आपको गरिमा के साथ सही काम करना है, तो फिर इस पूरी व्यवस्था से बाहर निकलकर अपने लिए एक अलग रास्ता बनाना पड़ेगा, नहीं तो आपको पाखंडी होना पड़ेगा। जैसे बड़ी कंपनीज़ पहले पॉल्यूशन करते हैं और फिर CSR का पाखंड।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: हेलो आचार्य जी, मैं गूगल लंडन में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। तो हम लोग एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म के लिए मीडिया प्लेबैक एंड एडिटिंग की लाइब्रेरी पर वर्क करते हैं। तो हमारी जो लाइब्रेरी है, वह बहुत सारी ऐप्स में यूज़ होती है, जैसे यूट्यूब, इन्स्टाग्राम, फोटोज़। आई ऐम नॉट श्योर कि हमारी गीता ऐप में यूज़ होती है या नहीं।
तो मेरा क्वेश्चन ये है कि जैसे हम जो काम कर रहे हैं, वो एक तरह से बहुत अच्छे मिशन में यूज़ हो रहा है, जैसे कुछ एजुकेशनल वीडियोज़ हो या गीता सेशन की वीडियोज़ हो। और ऑन द अदर हैंड, वही सेम टेक्नोलॉजी ऐसी चीजों में भी यूज़ हो रही है, जो लोगों को माइंडलेस स्क्रॉलिंग में डाल रही है। मतलब, उसी टेक्नोलॉजी का सही यूज़ भी हो रहा है और नेगेटिव यूज़ भी है। तो ऐसे केसेस में क्या हमें उसके इंपैक्टस की परवाह करनी चाहिए? या फिर, ऐज़ डूअर्स, हम कुछ कर सकते हैं उस चीज़ को लेकर? या फिर ये हमारे कंट्रोल में नहीं है, तो इसके बारे में नहीं सोचना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: बहुत नैरो आपने उसको बना दिया। आपकी टेक्नोलॉजी का जो भी लोग यूज़ करते हैं, वे आपकी कंपनी को पैसा देते हैं, ना?
प्रश्नकर्ता: मतलब, एक्ज़ैक्टली हमारा जो काम है, उसके लिए तो नहीं, बट इनडायरेक्टली हाँ। जैसे...




