अमर होने का अर्थ यह है कि मैंने एक ही जीवन में हज़ार जीवन जी लिए। अमर होने का अर्थ है प्रतिपल मरना। हर पल मरता हूँ; हर पल नया जन्म होता है। एक ज़िन्दगी में कई ज़िंदगियाँ जी ली हैं क्योंकि मेरे एक नहीं, हज़ार चेहरे हैं।
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आचार्य प्रशांत: आपके जीवन में अगर कुछ भी ऐसा है जो हमेशा ठीक है तो बात बड़ी गड़बड़ है; आपके जीवन में अगर कुछ भी ऐसा है जो हमेशा गड़बड़ है तो भी बात बहुत गड़बड़ है। प्रकृति में सबकी जगह है। कभी आपको बहुत बड़ा होना है, कभी बहुत बच्चा भी होना है। बिल्कुल ठीक है।
जब कहा जाता है कि ‘मैं अमर हूँ’, उसका मतलब आप समझते हैं क्या है?
अमर होने का अर्थ यह है कि – ‘मैंने एक ही जीवन में हज़ार जीवन जी लिए’। अमर होने का अर्थ है प्रतिपल मरना।
बड़ा विरोधाभास है।
अमर होने का अर्थ ही है: हर पल मरता हूँ; हर पल नया जन्म होता है। एक ज़िन्दगी में कई ज़िंदगियाँ जी ली हैं क्योंकि मेरे एक नहीं, हज़ार चेहरे हैं।
लोग आज भी ये मानने को तैयार नहीं हैं कि कृष्ण एक आदमी था। पश्चिम में बहुत लोगों ने अनुसन्धान किया है, वो कहते हैं कि भागवत पुराण का जो आदमी है वो गीता का आदमी हो ही नहीं सकता। व्यास ने ही लिख दी होगी गीता। और भागवत में भी कोई एक आदमी नहीं हो सकता। वो कहते हैं: ये सब अलग-अलग लोग हैं, इन सबको एक अम्ब्रेला नाम दे दिया गया है कृष्ण का। वो कहते हैं ये एक आदमी नहीं हो सकता।




