सही विकल्प चुनने और उसका परिणाम या प्रमाण पाने में एक फेज लैग होता है। उसको संयम या धैर्य बोलते हैं। सही विकल्प चलो, गलत विकल्प चलो। दोनों ही विकल्पों में तत्काल कोई परिणाम नहीं मिलना है।उतने समय तक चुपचाप सही काम बस करना होता है। और दुनिया में ऐसा कोई नहीं होता जिसको बिल्कुल ना पता हो अपनी जिंदगी में कि अगर मेरे पास यह पांच विकल्प हैं किसी भी क्षेत्र में तो इन पांचों में थोड़ा ऊपर कौन सा है? हमेशा आपको जो रिलेटिवली राइट है वो चुनना होता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। तो अभी मैं ऐसा देख पा रही हूँ आपको सुनने के बाद कि जो भीतर जो नॉइस था वो थोड़ा ऐसा लग रहा है कम हो रहा है। पर उसको मतलब इंटेंसिटी भी देख पा रही हूँ। पर वो सही डायरेक्शन में पता नहीं चल रहा। किस दिशा में जाऊँ? जैसे पहले जो काम कर रही थी सब ऐसे लगता है की व्यर्थ है। ये भी व्यर्थ है। पहले जो जिस काम में डूबी रहती थी उसमे एकदम मन नहीं लगता है और एकदम फ्रस्ट्रेट और हो जाती हूँ। और फिर जब कुछ काम और सही काम समझ नहीं आता। ऊर्जा तो बहुत देख पाती हूँ अपने भीतर कि कुछ करना है। ये कुछ करना है कुछ करना है। पर वो चीज मुझे समझ नहीं आ रही है इस समय। और आपको और सुन रही हूँ। समझ रही हूँ। पर यहीं पर मैं जाकर अटक रही हूँ।
आचार्य प्रशांत: सुनना समझना सब बहुत जल्दी अनुपयोगी हो जाता है। ये आपसे जो बातें हो रही हैं वो इस तरह की हो रही हैं। जैसे ट्रेजर हंट एक खेल होता है। जानते हैं उसमें ये होता है कि कहीं पर दूर एक खजाना पड़ा है और उस खजाने तक पहुँचने के जो निशान हैं, हिंट्स हैं, वह भी दूर-दूर बिखरे हुए हैं और एक जगह नहीं हैं। तो आप जैसे ही पहला हिंट पाते हो, तो आपको उस पर काम करना होता है और वो आपको बताएगा कि अगला कँहा मिलेगा और भाषा जो है उसकी थोड़ी क्रिप्टिक होती है। क्रिप्टिक माने कोडेड, तो आपको कुछ मिला और उसमें लिखा हुआ है कि है कहीं एक ऊँचा पर्वत उसकी चोटी पर बैठा है कोई और ऐसे से करके उसका मतलब ये है कि सामने वाली जो




