प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर। आपने पढ़ने के लिए एक किताब सुझाई था जिसका नाम था ‘लस्ट फ़ॉर लाइफ़’ बाय इरविन स्टोन, जो कि विन्सेंट वैन गॉग जी की बायोग्राफ़ी थी। सर, उन्होंने जो संघर्ष किया अपनी पूरी ज़िन्दगी में और वो बहुत कम आयु पर ही चले गये थे। क्या उनका संघर्ष आप वेदान्तिक दृष्टिकोण से बता सकते हैं? और जैसा कि हमें इतिहास से पता चलता है कि उनका भारत से, भारत के किसी भी फिलोसॉफ़ी से, न वेदान्त से, न किसी और से कोई सम्बन्ध नहीं था, फिर भी उन्होंने एक कोट कहा था कि ‘आइ पुट माइ हार्ट ऐंड माइ सोल इंटू माइ वर्क। ऐंड हैव लॉस्ट माइ माइंड इन द प्रोसेस‘ (मैंने अपना दिल और अपनी आत्मा अपने काम में लगा दी है, और अपना मन इस प्रक्रिया में खो दिया है)। तो सर, इसमें आपका वेदान्तिक दृष्टिकोण चाहिए था कि कैसे उन्होंने इतना महान संघर्ष किया था जिससे वो पेंटिंग की दुनिया में बहुत बड़ा नाम हैं और आपने उनकी पेंटिंग भी आज पीछे प्रदर्शित कर रखी है।
आचार्य प्रशांत: देखो, मिट्टी को ही अपने लिए आखिरी बात मान लेना बहुत आसान होता है। यही है और इसी में मुझे सन्तुष्टि पानी है। यही जो कुछ चल रहा है वही अंतिम है और प्रथम भी है, ये निष्कर्ष बड़ी आसानी से आ जाता है। और यही निष्कर्ष समाज और लोकधर्म सब हमारे ऊपर थोपना चाहते हैं अलग-अलग तरीकों से। ज़्यादातर लोग इस बात को स्वीकार कर लेते हैं, सिर झुका देते हैं, घुटने टेक देते हैं कि हाँ, ठीक है, ये दुनिया है और दुनिया ही बड़ी ऊँची बात है। दुनिया ऊँची बात है और दुनिया की बात को बहुत ऊँचा मानना है।
कुछ लोग होते हैं जिन्हें इसमें दिक्कत हो जाती है। सारी सच्ची कला उसी दिक्कत की अभिव्यक्ति होती है। सारी सच्ची कला एक विषमता की अभिव्यक्ति होती है। जो मुझे दिख रहा है, जो मुझे बताया जा रहा है, जो मुझे पढ़ाया जा रहा है, जो मुझ पर थोपा जा रहा है उसमें मुझे चैन नहीं मिल रहा है।
अब ये इसका नाम जानते हैं आप ये पीछे जो है? (पेंटिंग के बारे में पूछते हुए) ’स्टारी नाइट्स।’ यहाँ पर भी वो क्या कहना चाह रहें हैं? वो कह रहे हैं, ‘मेरी आँखें मुझसे कह रही हैं कि ये जो तारे और चाँद और नक्षत्र हैं रात के आकाश में, वो बहुत छोटी चीज़ हैं।‘ हैं न? इन्द्रियाँ यही बता रही हैं न? आकाश इतना बड़ा है और कालिमा इतनी विस्तृत है, उसमें तारे वगैरह तो सब क्या हैं? बिन्दुवत हैं। और एक बड़े क्षेत्र के सामने कुछ बिन्दुओं की क्या औकात होती है? कुछ भी नहीं।




