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गिल्ट छोड़ो, सीखो और आगे बढ़ो! || आचार्य प्रशांत
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4 months ago
Description

वीडियो जानकारी: 27.07.23, गीता समागम, गोवा Title : ग़लतियाँ, ग्लानि और जीवन में बदलाव || आचार्य प्रशांत ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी अपराधबोध (guilt), अहंकार, भीतर उठने वाले आकर्षणों, भटकाव और भविष्य की चिंता पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि साधना में न तो गिल्ट सही है और न ही अहंकार—सच्चा समर्पण किसी स्थायी स्थिति या गारंटी में नहीं है, बल्कि हर क्षण सजग बने रहने में है। आचार्य जी बताते हैं कि जब भी मन किसी प्रलोभन या बुलावे की ओर भागता है, तो उसे दबाने या नकारने की बजाय सीधे-सीधे उससे प्रश्न करना चाहिए—“तुम कौन हो, क्या देने आए हो?” यह जिज्ञासा ही मन को धोखे से बचाती है और आकर्षणों की शक्ति कम कर देती है। वे उदाहरण देते हैं कि जैसे कोई घटिया माल बेचने वाला पीछे लग जाए तो उससे सवाल-जवाब करके ही उसका झूठ पकड़ा जा सकता है। ठीक वैसे ही भीतर के प्रलोभनों से बातचीत करने पर वे अपनी ताक़त खो देते हैं। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि दमन समाधान नहीं है; जागरूकता ही उपाय है। जब ध्यान वर्तमान क्षण पर टिका होता है, तो भटकाव स्वतः कमज़ोर पड़ जाते हैं और मार्ग साफ़ होता जाता है।