वीडियो जानकारी: 10.05.2025, बोध प्रत्युषा सत्र, ग्रेटर नोएडा Title: सत्य बनाम पारिवारिक परंपरा: रामायण व महाभारत से सीख || आचार्य प्रशांत (2025) 📋 Chapters: 0:00 – Intro 1:25 – भाई, राष्ट्र या सत्य? 11:21 – रिश्ते बड़े या सत्य? 20:32 – कर्ण और भीष्म की भूल 34:11 – सत्य को सिंहासन पर बैठाओ 46:20 – अब महाभारत तय है 52:25 – Testimonial विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत जी महाभारत और रामायण के जीवंत प्रसंगों के सहारे समझाते हैं कि हमारी परंपराएँ अक्सर रिश्तों, वचनों, प्रतिष्ठा और “अपनों” को सत्य से ऊपर बिठा देती हैं। वे दिखाते हैं कि भीष्म, कर्ण, कुंभकर्ण, कुंती, द्रोपदी और धृतराष्ट्र—जब-जब सत्य से ऊपर अपने आग्रहों को रखा, विनाश अनिवार्य हुआ। आचार्य जी साफ कहते हैं: निष्ठा केवल सत्य के प्रति हो—सिंहासन, परिवार, जाति, परंपरा या राष्ट्र—सब पूजनीय तभी हैं जब वे सत्य की सेवा में हों; अन्यथा नहीं। जहाँ सत्य से समझौता होता है, वहाँ महाभारत होना तय है। यह संवाद दर्शक को आत्म-परीक्षण के लिए आमंत्रित करता है—किन क्षणों में हम सत्य से समझौता करते हैं, और उस समय हमारा चयन हमें कहाँ ले जाता है?