वीडियो जानकारी: 18.09.25, Oxford Book store, नई दिल्ली Title : काम और रिश्तों में ऊँचाई कैसे लाएँ? || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस प्रश्नोत्तर सत्र में दो गहरे जीवन-संघर्ष सामने आते हैं। पहले सवाल में एक बेटी अपने पिता की शराब की लत का दर्द साझा करती है—वो पिता जिन्होंने उसकी बीमारी के समय उसका इलाज करवाया, पर अब बार-बार पीने, बीमार पड़ने और माफ़ी मांगने के चक्र में फँस गए हैं। आचार्य प्रशांत बताते हैं कि लत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे वातावरण की उपज होती है। बदलाव लाने के लिए व्यक्ति ही नहीं, उसके रिश्तों, माहौल और जीवन-पद्धति को बदलना ज़रूरी है। दूसरे सवाल में एक शिक्षिका पूछती हैं कि जब बार-बार असफलता मिलती है और थकान हावी हो जाती है, तब भी अगर भीतर से वही पुकार आती है, तो क्या करें? आचार्य जी कहते हैं कि हताशा तब होती है जब हम काम से ज़्यादा उसके नतीजों से प्यार करते हैं। वे सलाह देते हैं कि ज़रूरी काम को पूरी ऊर्जा और निष्ठा से करें—इतनी पूर्णता से कि निराश होने के लिए भी ताक़त न बचे। सच्चा समर्पण परिणाम या मान्यता पर नहीं, बल्कि अपने पूरे अस्तित्व को सही दिशा में झोंक देने पर टिकता है। यह सत्र पारिवारिक पीड़ा, आंतरिक मज़बूती और अपेक्षा-रहित कर्म की आज़ादी पर गहरा चिंतन है—एक आमंत्रण कि हम दुख, लत और असफलता का सामना कैसे करते हैं, इसे नए सिरे से देखें।