वीडियो जानकारी: 11.07.23, गीता समागम, गोवा Title : प्रकृति के तीन गुण: सत, रज, तम || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी निष्काम कर्म, आलस्य और गुणों (तम, रज, सत) की गहराई पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी बताते हैं कि तामसिक व्यक्ति गलत जगह सुख खोजता है, राजसिक व्यक्ति दौड़ में लगा रहता है, और सात्विक व्यक्ति ज्ञान में उलझ जाता है — तीनों ही प्रकृति के बंधन में हैं। मुक्ति का अर्थ किसी एक गुण को अपनाना नहीं, बल्कि तीनों से ऊपर उठना है — गुणातीत होना। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि मुक्ति समय या प्रक्रिया से नहीं मिलती; यह तब संभव है जब भीतर की बेचैनी इतनी सच्ची हो कि व्यक्ति तुरंत सत्य की ओर कूद पड़े।