वीडियो जानकारी: 23.10.23, गीता समागम, ग्रेटर नोएडा Title: अहंकार रहित काया मंदिर, अहंकार का मिटना ही पूजा || आचार्य प्रशांत (2023) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी चर्चा कर रहे हैं कि इंसान की काया (शरीर) अहंकार से भरी हो तो वही नरक है, और जब अहंकार मिट जाता है तो वही काया मंदिर बन जाती है। गणेश जी की कथा के माध्यम से वे समझाते हैं कि केवल कर्म करने से कुछ नहीं होगा, सही समझ और ज्ञान ज़रूरी है। बिना ज्ञान के कर्म बस अंधी दौड़ है। मूर्ति पूजा और संतों की देह का महत्व भी इसलिए है क्योंकि उनसे हमें निर्गुण सत्य का संकेत मिलता है, जो हमारी आँखों से सीधे नहीं दिखता। आचार्य जी यह भी स्पष्ट करते हैं कि अहंकार मनुष्य को कुरूप बना देता है, जबकि आत्मज्ञान जीवन को सुंदर और चमकदार बना देता है। पुरुष और प्रकृति का सही संबंध तभी संभव है जब पुरुष (चेतना) मुक्त हो और प्रकृति अपनी सहजता में बनी रहे।